अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार से स्वास्थ्य सेवाओं पर असर
महाराजगंज जिले में अपनी लंबित मांगों को लेकर आशा कार्यकर्ताओं और आशा संगिनियों ने मोर्चा खोल दिया है। शुक्रवार को मिठौरा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (जगदौर) पर बड़ी संख्या में एकत्रित होकर कार्यकर्ताओं ने अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार और धरना-प्रदर्शन का शंखनाद किया। कार्यकर्ताओं ने स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी मांगों पर शासन स्तर से कोई ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक उनका यह आंदोलन अनवरत जारी रहेगा।
प्रमुख मांगें और ज्ञापन
आशा कार्यकर्ता संघ की जिलाध्यक्ष जमीरुन निशा के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने मिठौरा सीएचसी अधीक्षक डॉ. डीएन सिंह को एक ज्ञापन सौंपा। संघ की प्रमुख मांगों में आशाओं को राज्य कर्मचारी का दर्जा दिया जाना, निश्चित मानदेय निर्धारित करना, और समान कार्य के लिए समान वेतन व अधिकार प्रदान करना शामिल है। कार्यकर्ताओं का कहना है कि वे वर्षों से स्वास्थ्य विभाग की रीढ़ बनकर जमीनी स्तर पर सेवाएं दे रही हैं, लेकिन उनकी आर्थिक स्थिति में कोई विशेष सुधार नहीं हुआ है।
स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ेगा प्रभाव
आंदोलन की घोषणा करते हुए संघ ने साफ कर दिया है कि वे केवल प्रसव संबंधी सेवाओं को छोड़कर अन्य सभी विभागीय कार्यों का अनिश्चितकालीन बहिष्कार करेंगी। इस निर्णय से टीकाकरण, स्वास्थ्य सर्वेक्षण और अन्य सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन पर असर पड़ना तय है। आंदोलन के दौरान मौके पर पुनीता देवी, माया देवी, शशिकला, बेबी, संगीता, स्नेहलता, परमज्योति देवी, मेवाती, सरिता, बिंदा देवी, सीमा देवी, मीरा देवी और बबिता सहित दर्जनों कार्यकर्ता मौजूद रहीं।
प्रशासन की भूमिका
सीएचसी अधीक्षक को सौंपे गए ज्ञापन के माध्यम से कार्यकर्ताओं ने शासन तक अपनी आवाज पहुंचाने का आग्रह किया है। कार्यकर्ताओं का तर्क है कि महंगाई के दौर में वर्तमान मानदेय में परिवार का भरण-पोषण करना कठिन हो गया है। स्थानीय प्रशासन अब इस मामले की रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेजने की तैयारी में है। जिले के स्वास्थ्य महकमे के लिए आशा कार्यकर्ताओं का यह कार्य बहिष्कार एक बड़ी चुनौती के रूप में देखा जा रहा है।