कलेक्ट्रेट में प्रदर्शन और मुख्यमंत्री को सौंपा ज्ञापन
महराजगंज जिले में मेडिकल स्टोर संचालकों ने प्रशासन के हालिया आदेशों के खिलाफ आवाज उठाई है। सोमवार को कलेक्ट्रेट परिसर में फार्मेसी एंड फार्मासिस्ट वेलफेयर एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर एक ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपा। यह ज्ञापन प्रदेश के मुख्यमंत्री को संबोधित है, जिसमें छोटे दवा कारोबारियों को आ रही व्यावहारिक समस्याओं को प्रमुखता से उठाया गया है।
निजी वेबसाइट की अनिवार्यता से बढ़ी चिंता
एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष शेषमणि गुप्ता के नेतृत्व में पहुंचे प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग द्वारा 6 अक्टूबर 2026 को जारी आदेश के बाद से मेडिकल स्टोर संचालकों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। इस आदेश के तहत सभी मेडिकल स्टोरों को अपनी निजी वेबसाइट बनाकर उस पर साप्ताहिक स्टॉक और फार्मासिस्ट का विवरण अपडेट करना अनिवार्य कर दिया गया है।
एसोसिएशन का तर्क है कि छोटे स्तर पर काम करने वाले दवा दुकानदारों के लिए तकनीकी और आर्थिक दृष्टि से अपनी निजी वेबसाइट का संचालन करना काफी खर्चीला और जटिल है। जिलाध्यक्ष शेषमणि गुप्ता ने कहा, “छोटे दवा कारोबारियों पर इस तरह का अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालना अनुचित है। विभाग को चाहिए कि वह स्टोरों को निजी वेबसाइट बनवाने के बजाय सरकार की ओर से ही कोई निशुल्क पोर्टल उपलब्ध कराए, जिससे फार्मासिस्ट और स्टॉक का विवरण पारदर्शी तरीके से दर्ज हो सके।”
दवाओं की कीमतों पर नियंत्रण की मांग
ज्ञापन में सिर्फ पोर्टल और वेबसाइट का मुद्दा ही नहीं, बल्कि आम जनता पर पड़ रहे आर्थिक बोझ का भी जिक्र किया गया है। एसोसिएशन ने दवाओं की अनियंत्रित बढ़ती कीमतों पर चिंता व्यक्त की। पदाधिकारियों का कहना है कि ड्रग प्राइस कंट्रोल ऑर्डर (DPCO) के दायरे से बाहर की दवाएं अत्यधिक ट्रेड मार्जिन पर बेची जा रही हैं, जिसका सीधा असर मरीजों और उनके परिवारों पर पड़ रहा है।
एसोसिएशन ने मांग की है कि दवा कंपनियां फॉर्मूलेशन में मामूली बदलाव कर दवाओं को मूल्य नियंत्रण से बाहर करने की जो प्रवृत्ति अपना रही हैं, उस पर प्रशासन को सख्त रुख अपनाना चाहिए। प्रतिनिधिमंडल ने सरकार से दवाओं के दाम तय करने के लिए अधिक प्रभावी नीति बनाने की अपील की है ताकि आम आदमी को सस्ती और सुलभ दवाएं मिल सकें। कलेक्ट्रेट परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम में जिले के कई मेडिकल स्टोर संचालक मौजूद रहे, जिन्होंने सरकार से अपनी समस्याओं के समाधान की उम्मीद जताई है।