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महाराजगंज की बेटी शिखा पाठक: विश्व खेलों में बनीं भारत की पहली महिला रेफरी

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खेल जगत में महराजगंज का बढ़ा मान

महराजगंज जिले के आनंदनगर की रहने वाली शिखा पाठक ने अपनी प्रतिभा और दृढ़ संकल्प के बल पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इतिहास रच दिया है। शिखा चीन के चेंगदू में आयोजित 12वें विश्व खेलों (World Games) में जू-जित्सु (Ju-Jitsu) की रेफरी के रूप में भारत का प्रतिनिधित्व करने वाली इकलौती महिला बनी हैं। यह उपलब्धि न केवल उनके करियर के लिए एक बड़ा पड़ाव है, बल्कि देश के खेल प्रशासन में महिलाओं की बढ़ती भूमिका को भी रेखांकित करती है।

आठ शीर्ष रेफरियों में शामिल

इस प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय आयोजन के लिए दुनिया भर से कुल आठ शीर्ष तकनीकी अधिकारियों (रेफरियों) का चयन किया गया था, जिनमें शिखा पाठक का नाम शामिल होना पूरे देश के लिए गर्व का विषय है। वह न केवल भारत की एकमात्र प्रतिनिधि रहीं, बल्कि एशिया की पहली महिला अंतरराष्ट्रीय तकनीकी अधिकारी के रूप में भी अपनी पहचान दर्ज कराई है। शिखा का यह सफर संघर्षों और समाज की बंदिशों को तोड़कर सफलता के शिखर तक पहुंचने की एक प्रेरणादायक दास्तान है।

गोरखपुर से विश्व मंच तक का सफर

शिखा पाठक का खेल करियर गोरखपुर से शुरू हुआ था। वर्ष 2005 में गोरखपुर से राष्ट्रीय जूडो पदक जीतने वाली वह पहली खिलाड़ी थीं। अपनी खेल प्रतिभा को निखारने के लिए उन्होंने लक्ष्मीबाई नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ फिजिकल एजुकेशन (LNIPE), ग्वालियर से उच्च शिक्षा प्राप्त की। वर्ष 2012 में स्नातक और 2014 में परास्नातक की डिग्री पूरी करने के बाद उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में कदम रखा। वर्तमान में वह सहायक प्रोफेसर के रूप में कार्यरत हैं और साथ ही अपनी शिक्षण जिम्मेदारियों के बीच नई प्रतिभाओं को भी तराश रही हैं। उनके मार्गदर्शन में कई छात्राओं ने राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतकर जिले का नाम रोशन किया है।

बेटियों के लिए प्रेरणा

शिखा का मानना है कि बेटियां किसी भी क्षेत्र में अपनी दक्षता साबित करने में सक्षम हैं। मध्यमवर्गीय परिवार से ताल्लुक रखने वाली शिखा को अपने शुरुआती दौर में कई बंदिशों का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने अपने माता-पिता को आत्मविश्वास और लक्ष्य की स्पष्टता के साथ राजी किया। नवरात्र के पावन अवसर पर उनकी यह उपलब्धि समाज को शांति, संयम और आंतरिक शक्ति के साथ आगे बढ़ने का संदेश दे रही है। उनकी सफलता उन ग्रामीण और मध्यमवर्गीय परिवारों की बेटियों के लिए एक मशाल की तरह है, जो खेल की दुनिया में अपना भविष्य तलाश रही हैं।

(संवाददाता)

संवाददाता के संपादक

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