दिवाली पर उल्लुओं के शिकार को रोकने के लिए सख्त निगरानी
महराजगंज जिले के सोहगीबरवां वन्य जीव प्रभाग में इस बार दिवाली के अवसर पर उल्लुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए वन विभाग ने कमर कस ली है। दशहरा पर्व के समापन के तुरंत बाद वन विभाग की 13 विशेष टीमें 24 घंटे की शिफ्ट में क्षेत्र की निगरानी करेंगी। यह कदम तांत्रिक क्रियाओं और अंधविश्वास के चलते दीपावली के आसपास बढ़ जाती उल्लुओं की तस्करी और शिकार की घटनाओं को रोकने के लिए उठाया गया है।
सोहगीबरवां की जैव विविधता पर मंडराता खतरा
सोहगीबरवां वन्य जीव प्रभाग अपनी समृद्ध जैव विविधता के लिए जाना जाता है और यह कई दुर्लभ प्रजातियों का प्राकृतिक आवास है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार, क्षेत्र में दुर्लभ ‘व्हाइट आई बजर्ड’ सहित उल्लुओं की कई प्रजातियां पाई जाती हैं। हर साल दीपावली के समय कुछ असामाजिक तत्व तांत्रिक क्रियाओं के लिए इन मूक पक्षियों का शिकार करते हैं। वन विभाग इस कुप्रथा को जड़ से खत्म करने के लिए इस बार कोई ढिलाई नहीं बरतना चाहता।
तैयारी और निगरानी की रणनीति
डीएफओ कार्यालय द्वारा जारी निर्देशों के तहत, 13 टीमों को विशेष रूप से चिन्हित संवेदनशील इलाकों में तैनात किया जा रहा है। ये टीमें न केवल गश्त करेंगी, बल्कि स्थानीय लोगों और समुदायों के बीच जाकर उन्हें वन्य जीव संरक्षण अधिनियम के प्रति जागरूक भी करेंगी। निगरानी व्यवस्था को शिफ्टों में विभाजित किया गया है ताकि किसी भी अनहोनी की सूचना मिलने पर त्वरित कार्रवाई की जा सके।
- कुल टीमें: 13 विशेष वन दल
- कार्य प्रणाली: 24 घंटे शिफ्ट-वार निगरानी
- मुख्य उद्देश्य: उल्लुओं की तस्करी और अवैध शिकार पर पूर्ण रोक
- क्षेत्र: सोहगीबरवां वन्य जीव प्रभाग
वन विभाग के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि वन्य जीवों का शिकार करना एक गंभीर अपराध है। दिवाली के दौरान वन विभाग ने आम जनता से भी अपील की है कि यदि उन्हें कहीं भी संदिग्ध गतिविधि या किसी वन्य जीव को कैद में रखने की जानकारी मिले, तो वे तुरंत स्थानीय वन कार्यालय को सूचित करें। प्रशासन का मुख्य लक्ष्य सोहगीबरवां की प्राकृतिक संपदा और दुर्लभ वन्य जीवों को सुरक्षित रखना है।