सेवरही थाने के सिपाही पर मिलीभगत का आरोप
कुशीनगर जिले के सेवरही थाना क्षेत्र में एक मारपीट के मुकदमे की जांच पूरी होने के बावजूद आरोपपत्र (चार्जशीट) न्यायालय में दाखिल न किए जाने का गंभीर मामला सामने आया है। पीड़ित ने थाने के पैरवीकार सिपाही पर विपक्षियों से मिलीभगत करने और जानबूझकर कानूनी प्रक्रिया में देरी करने का आरोप लगाया है। इस संबंध में पीड़ित ने पुलिस अधीक्षक (एसपी) को प्रार्थना पत्र सौंपकर मामले में उच्च स्तरीय हस्तक्षेप की मांग की है।
क्या है पूरा मामला?
आजाद नगर निवासी पीड़ित राजेंद्र गोंड पुत्र रामचंद्र गोंड ने अपनी शिकायत में बताया कि 21 अप्रैल 2026 को उन्होंने मारपीट के एक मामले में सेवरही थाने में मुकदमा पंजीकृत कराया था। मामले की विवेचना तमकुहीराज के क्षेत्राधिकारी द्वारा की गई और जांच के बाद चार्जशीट तैयार कर ली गई। पीड़ित का आरोप है कि थाने के पैरवीकार सिपाही दीपुल ने चार्जशीट से संबंधित सभी दस्तावेज रिसीव कर लिए थे, लेकिन एक लंबा समय बीत जाने के बाद भी उसे न्यायालय में दाखिल नहीं किया गया है।
जांच में देरी पर उठे सवाल
राजेंद्र गोंड का कहना है कि जब भी वह सिपाही दीपुल से चार्जशीट दाखिल करने के बारे में जानकारी मांगते हैं, तो उन्हें हर बार अगले दिन आने का आश्वासन देकर टाल दिया जाता है। इस लगातार टालमटोल से पीड़ित को न्याय मिलने में देरी होने की गहरी आशंका है। उन्होंने आरोप लगाया है कि यह देरी केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि विपक्षियों के साथ साठ-गांठ का परिणाम हो सकती है। पीड़ित ने एसपी से इस मामले में जवाबदेही तय करने और संबंधित सिपाही के खिलाफ कार्रवाई करने की अपील की है।
स्थानीय लोगों पर असर
पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठते इस तरह के सवाल स्थानीय नागरिकों के बीच चर्चा का विषय बने हुए हैं। आम जनता का मानना है कि यदि पुलिस विभाग की ओर से इस प्रकार की देरी की जाती है, तो पीड़ितों का भरोसा न्याय व्यवस्था से उठने लगता है। अब सभी की निगाहें पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर टिकी हैं कि क्या इस शिकायत के बाद सिपाही की भूमिका की जांच की जाएगी और चार्जशीट को अविलंब न्यायालय में भेजा जाएगा।