महराजगंज में बुजुर्गों की आबादी में 1.2 फीसदी की वृद्धि
महराजगंज जिले की जनसांख्यिकीय संरचना में पिछले पांच वर्षों के दौरान महत्वपूर्ण बदलाव देखे गए हैं। नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (एनएफएचएस) के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, जिले में बुजुर्ग आबादी की हिस्सेदारी में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2019-20 की तुलना में 2023-24 के बीच बुजुर्गों की संख्या में 1.2 फीसदी का इजाफा हुआ है, जो स्वास्थ्य सेवाओं की बेहतर पहुंच और औसत आयु में सुधार की ओर इशारा करता है।
बच्चों और बुजुर्गों के आंकड़ों में तुलनात्मक अंतर
एनएफएचएस-6 सर्वे के विश्लेषण से स्पष्ट होता है कि बच्चों की तुलना में बुजुर्गों की आबादी के अनुपात में तेज वृद्धि हुई है। वर्ष 2019-20 में जिले में पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों की कुल जनसंख्या 9.5 प्रतिशत थी, जो 2023-24 तक मामूली रूप से बढ़कर 9.7 प्रतिशत तक पहुंची है। वहीं, दूसरी ओर 60 वर्ष या उससे अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों का प्रतिशत इसी अवधि में 9.1 से बढ़कर 10.3 प्रतिशत हो गया है। बच्चों की संख्या में हुई 0.2 प्रतिशत की वृद्धि के मुकाबले बुजुर्गों की संख्या में लगभग 1.2 प्रतिशत की अधिक वृद्धि दर्ज की गई है, जो जीवन प्रत्याशा में सुधार का संकेत है।
स्वास्थ्य और पोषण का महत्व
इस जनसांख्यिकीय बदलाव पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ. केपी सिंह ने स्वास्थ्य जागरूकता को प्राथमिकता दी है। उन्होंने बताया कि बढ़ती औसत आयु और स्वास्थ्य में सुधार के पीछे खान-पान और पोषण का बड़ा हाथ है। डॉ. सिंह के अनुसार, आयोडीनयुक्त नमक का नियमित सेवन शरीर के लिए अत्यंत आवश्यक है। यह थायराइड हार्मोन के सुचारू उत्पादन और शरीर के सामान्य कामकाज में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
सीएमओ ने स्पष्ट किया कि आयोडीन की कमी से न केवल थायराइड ग्रंथि की कार्यप्रणाली प्रभावित होती है, बल्कि यह शरीर में कई अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं को भी जन्म दे सकती है। स्वास्थ्य विभाग अब बुजुर्गों के लिए विशेष स्वास्थ्य कार्यक्रमों पर जोर देने की योजना बना रहा है ताकि बढ़ती उम्र के साथ उन्हें बेहतर चिकित्सा सुविधाएं मिल सकें।
स्थानीय स्वास्थ्य प्रणाली पर असर
बुजुर्गों की बढ़ती संख्या को देखते हुए अब जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के लिए नई चुनौतियां सामने आ रही हैं। वृद्धों के लिए विशेष स्वास्थ्य शिविरों, समय पर जांच और जेरियाट्रिक (Geriatric) देखभाल सेवाओं को विस्तार देने की आवश्यकता महसूस की जा रही है। स्थानीय स्तर पर स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पोषण संबंधी जागरूकता और चिकित्सा सुविधाएँ इसी प्रकार बनी रहीं, तो भविष्य में वरिष्ठ नागरिकों के स्वास्थ्य सूचकांक में और अधिक सुधार देखने को मिल सकता है।