गोरखपुर-फैजाबाद और आगरा में चुनाव आयोग की सख्त कार्रवाई
उत्तर प्रदेश में हाल ही में संपन्न हुए एमएलसी स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव में हुई कथित अनियमितताओं के बाद भारत निर्वाचन आयोग ने सख्त रुख अपनाते हुए बड़ा प्रशासनिक फेरबदल किया है। 23 अक्टूबर 2026 को हुए मतदान के दौरान सामने आई गंभीर शिकायतों और लापरवाही का संज्ञान लेते हुए आयोग ने गोरखपुर-फैजाबाद और आगरा क्षेत्र में तैनात अधिकारियों पर कार्रवाई की है।
गोरखपुर-फैजाबाद क्षेत्र के प्रेक्षक हटाए गए
गोरखपुर-फैजाबाद खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में चुनाव पर्यवेक्षक (इलेक्शन ऑब्जर्वर) के रूप में तैनात 2007 बैच के आईएएस अधिकारी अभय सिंह को आयोग ने ड्यूटी से अवमुक्त कर दिया है। यह कार्रवाई बीजेपी के बागी नेता और एमएलसी देवेंद्र प्रताप सिंह द्वारा की गई औपचारिक शिकायतों के बाद की गई है। शिकायत में प्रेक्षक के खिलाफ अवैध खनन मामले में सीबीआई जांच और आवास से नकदी बरामदगी जैसे गंभीर आरोप लगाए गए थे। आयोग ने तुरंत प्रभाव से 2009 बैच के आईएएस अधिकारी प्रकाश बिंदु को नया चुनाव पर्यवेक्षक नियुक्त किया है। नए प्रेक्षक को 27 अक्टूबर 2026 को होने वाली मतगणना के लिए रिपोर्ट पेश करने के स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं।
आगरा में 6 सुपरवाइजरी अधिकारी निलंबित
दूसरी ओर, आगरा डिवीजन शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में भी चुनाव आयोग ने कड़ी कार्रवाई की है। पोलिंग स्टेशन संख्या 20, 21 और 26 पर पुनर्मतदान (री-पोल) के दौरान हुई गड़बड़ियों और लापरवाही को आयोग ने बेहद गंभीरता से लिया है। इन केंद्रों पर तैनात रहे कुल 6 सुपरवाइजरी अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। आयोग की ओर से जारी प्रेस रिलीज में स्पष्ट किया गया है कि चुनावी प्रक्रिया की शुचिता बनाए रखने के लिए किसी भी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
मतगणना पर प्रशासन की नजर
आयोग के इस एक्शन से प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है। गोरखपुर और आगरा दोनों ही क्षेत्रों में चुनाव की निष्पक्षता को लेकर आयोग ने कड़ी निगरानी के निर्देश दिए हैं। 27 अक्टूबर को होने वाली मतगणना के लिए अब प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। आयोग ने नए नियुक्त किए गए अधिकारियों को पूरी पारदर्शिता के साथ मतगणना सुनिश्चित करने का आदेश दिया है, ताकि चुनावी नतीजों की विश्वसनीयता पर कोई सवाल न उठ सके।