न्यायालय में विचाराधीन मामले को छुपाने का आरोप
कुशीनगर के चित्रगुप्त मंदिर परिसर में जारी विवाद के बीच एक नया मोड़ सामने आया है। मंदिर प्रबंधन का आरोप है कि मंदिर के व्यवस्थापन के खिलाफ जिलाधिकारी को शिकायत करने वाले स्वयंसेवी संस्था के पदाधिकारियों ने जानबूझकर प्रशासन को गुमराह किया है। मंदिर की व्यवस्था संभाल रहे ‘चित्रगुप्त मंदिर समिति ट्रस्ट’ का कहना है कि शिकायतकर्ताओं ने अपने प्रार्थना पत्र में न्यायालय में पहले से लंबित मुकदमे का कोई उल्लेख नहीं किया, जो कि तथ्यों को छिपाने की श्रेणी में आता है।
तहसीलदार की जांच में सामने आई सच्चाई
जिलाधिकारी के निर्देश पर पडरौना के तहसीलदार ने राजस्व टीम के साथ मौके पर पहुंचकर गहन निरीक्षण किया। जांच के दौरान ट्रस्ट के महासचिव ने स्पष्ट किया कि मंदिर के प्रबंधन और अधिकार क्षेत्र को लेकर सिविल कोर्ट (जूनियर डिवीजन) में पहले से ही एक मुकदमा विचाराधीन है। इस पर तहसीलदार ने आश्चर्य जताते हुए कहा कि शिकायतकर्ता द्वारा सौंपे गए पत्र में इस कानूनी विवाद का कहीं कोई जिक्र नहीं है। राजस्व विभाग की टीम ने दोनों पक्षों से पूछताछ की और उनके बयान दर्ज किए हैं।
न्यायिक प्रक्रिया बनाम प्रशासनिक शिकायत
ट्रस्ट का आरोप है कि स्वयंभू ‘श्री श्री चित्रगुप्त समिति’ से जुड़े कुछ लोग मंदिर की जमीन पर व्यावसायिक निर्माण और अनाधिकृत हस्तक्षेप का प्रयास कर रहे हैं। इस मामले में ट्रस्ट ने पहले ही सिविल कोर्ट में वाद दायर कर रखा है, जिसमें आगामी 24 नवंबर को सुनवाई निर्धारित है। कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा होने के बावजूद प्रशासन को अलग से शिकायत पत्र देना और उसमें मुकदमे की जानकारी न देना, शिकायतकर्ता की मंशा पर सवालिया निशान लगाता है।
प्रशासन को गुमराह करने का आरोप
शिकायतकर्ता संस्था के लेटरपैड पर यह लिखित दावा किया गया था कि उनके खिलाफ कहीं कोई मामला लंबित नहीं है। ट्रस्ट के अनुसार, यह तथ्य पूरी तरह से गलत है और न्यायालय की अवमानना के समान है। ट्रस्ट ने स्पष्ट किया है कि वे पूरी तरह से न्यायिक प्रक्रिया का सम्मान करते हैं और सभी साक्ष्य अदालत के समक्ष प्रस्तुत किए जा चुके हैं। मंदिर प्रबंधन ने मांग की है कि प्रशासन को गुमराह करने के प्रयासों पर संज्ञान लिया जाए और कानून सम्मत कार्रवाई की जाए। फिलहाल, इस मामले में प्रशासनिक जांच के बाद अब सभी की निगाहें अगली अदालती तारीख पर टिकी हुई हैं।