संस्थागत प्रसव के लक्ष्य में पिछड़ रहा महराजगंज
महराजगंज जिले में ‘जननी सुरक्षा योजना’ के तहत संस्थागत प्रसव (institutional deliveries) को बढ़ावा देने के सरकारी प्रयासों की गति धीमी बनी हुई है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, सितंबर 2026 तक निर्धारित लक्ष्य के मुकाबले जिले ने केवल 70.1 प्रतिशत उपलब्धि हासिल की है। इस सुस्त प्रदर्शन के चलते महराजगंज प्रदेश की रैंकिंग में 37वें स्थान पर खिसक गया है। हालांकि, गोरखपुर मंडल के अंतर्गत जिला अभी भी दूसरे स्थान पर कायम है, लेकिन सुधार की काफी गुंजाइश बनी हुई है।
ब्लॉकवार प्रदर्शन और चुनौतियां
वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए जिले को कुल 38,454 संस्थागत प्रसव का लक्ष्य आवंटित किया गया था। इस अवधि में 13,480 प्रसव दर्ज किए गए हैं। ब्लॉकवार स्थिति का विश्लेषण करें तो प्रदर्शन में भारी अंतर देखने को मिलता है:
- धानी ब्लॉक: 82.7 प्रतिशत उपलब्धि के साथ शीर्ष पर।
- सिसवा और घुघली: क्रमशः 73.7 और 70.1 प्रतिशत का प्रदर्शन।
- निम्न प्रदर्शन वाले ब्लॉक: फरेंदा (53.8 प्रतिशत) और रतनपुर (50.9 प्रतिशत) जैसे क्षेत्रों में प्रदर्शन सबसे कमजोर है, जहां स्वास्थ्य विभाग को तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता है।
पिछले वर्ष के आंकड़ों से तुलना करने पर स्थिति अधिक चिंताजनक प्रतीत होती है। मई 2025 की रिपोर्ट के अनुसार, उस दौरान जिले ने 83.49 प्रतिशत उपलब्धि हासिल की थी। इस वर्ष आंकड़ों में गिरावट स्वास्थ्य विभाग के लिए एक बड़ी चुनौती बनकर उभरी है।
पोर्टल पर पंजीकरण और भुगतान की स्थिति
मंत्रा पोर्टल के आंकड़ों के अनुसार, 1 अप्रैल से 23 अक्टूबर 2026 के बीच कुल 16,280 प्रसव दर्ज किए गए हैं। प्रक्रियात्मक जटिलताओं के कारण 2,534 लाभार्थियों का पंजीकरण अभी भी लंबित है। भुगतान की स्थिति की बात करें तो 13,422 प्रस्तावों में से 13,406 लाभार्थियों को अब तक धनराशि हस्तांतरित की जा चुकी है, जबकि 100 लाभार्थियों का भुगतान अभी प्रक्रिया में है। कुल मिलाकर भुगतान की उपलब्धि 82 प्रतिशत दर्ज की गई है, जिसमें लक्ष्मीपुर ब्लॉक 88 प्रतिशत के साथ सबसे आगे है।
अधिकारियों का रुख
इस स्थिति पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) डॉ. सुरेंद्र कुमार चौधरी ने बताया कि संस्थागत प्रसव की दर बढ़ाने के लिए सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को सख्त निर्देश जारी किए गए हैं। उन्होंने कहा, ‘आशा और एएनएम के माध्यम से गर्भवती महिलाओं को सरकारी अस्पतालों में प्रसव के लिए जागरूक किया जा रहा है। जिन ब्लॉकों में उपलब्धि कम है, वहां विशेष समीक्षा बैठकें आयोजित की जाएंगी। पंजीकरण और भुगतान के लंबित मामलों का सत्यापन कर उन्हें प्राथमिकता के आधार पर निस्तारित किया जाएगा।’