भक्तिमय माहौल में हुआ ताड़का वध का मंचन
महाराजगंज जिले के अड्डा बाजार क्षेत्र स्थित चमैनिया उर्फ भेड़ही गांव में आयोजित रामलीला के दौरान कलाकारों ने पौराणिक प्रसंगों का अत्यंत सजीव मंचन किया। मंगलवार की रात जैसे ही मंच पर ताड़का वध का दृश्य प्रस्तुत हुआ, पूरा पंडाल प्रभु श्रीराम के जयकारों से गूंज उठा। कलाकारों के अभिनय ने दर्शकों को भक्ति के सागर में डूबो दिया।
पुत्रेष्टि यज्ञ से ताड़का वध तक का सफर
रामलीला के मंचन में सबसे पहले राजा दशरथ की चिंता और उनके द्वारा पुत्रेष्टि यज्ञ कराए जाने के प्रसंग को दिखाया गया। कलाकारों ने दर्शाया कि किस प्रकार राजा दशरथ ने गुरु वशिष्ठ के परामर्श पर यज्ञ का आयोजन किया, जिसके फलस्वरूप भगवान श्रीराम सहित चार पुत्रों का जन्म हुआ। मंचन के माध्यम से राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न के जन्म की खुशियों को दर्शकों ने बखूबी महसूस किया।
इसके बाद के दृश्यों में ऋषि विश्वामित्र का अयोध्या आगमन और यज्ञ की रक्षा के लिए राम-लक्ष्मण को अपने साथ वन ले जाने का प्रसंग फिल्माया गया। महाराज दशरथ ने गुरु वशिष्ठ की आज्ञा मानकर अपने दोनों पुत्रों को ऋषि विश्वामित्र के साथ भेजा। नाटक का मुख्य आकर्षण ताड़का वन का दृश्य था, जहाँ राक्षसी ताड़का ने राजकुमारों का मार्ग अवरुद्ध करने का प्रयास किया।
जय श्रीराम के नारों से गूंजा पंडाल
युद्ध के दौरान प्रभु श्रीराम द्वारा ताड़का का वध करने का सजीव दृश्य देखकर दर्शक भाव-विभोर हो गए। जैसे ही ताड़का का अंत हुआ, पंडाल में उपस्थित श्रद्धालुओं ने एक स्वर में ‘जय श्रीराम’ के जयकारे लगाए। स्थानीय निवासियों के अनुसार, इस तरह के आयोजन न केवल संस्कृति को जीवित रखते हैं, बल्कि युवाओं को अपनी परंपराओं से भी जोड़ते हैं।
इस अवसर पर प्रहलाद चौधरी, विशंभर चौधरी, राजेश गुप्ता सहित गांव के अन्य गणमान्य व्यक्ति और बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे। रामलीला समिति के सदस्यों ने बताया कि आने वाले दिनों में सीता स्वयंवर और अन्य प्रमुख लीलाओं का भी मंचन किया जाएगा। कार्यक्रम के दौरान सुरक्षा और शांति व्यवस्था बनाए रखने में स्थानीय लोगों ने भी अपना पूर्ण सहयोग दिया।