धनतेरस 2026: खरीदारी और लक्ष्मी पूजन का महत्व
दीपावली के महापर्व की शुरुआत धनतेरस के दिन से होती है, जिसे धनत्रयोदशी के नाम से भी जाना जाता है। इस वर्ष 2026 में धनतेरस का पर्व अत्यंत शुभ योगों के साथ आ रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी, भगवान गणेश और कुबेर देवता की पूजा का विशेष विधान है। खरीदारी के लिए पूरे भारत के 50 प्रमुख शहरों में मुहूर्त की गणना पंचांग और चौघड़िया के आधार पर की गई है।
शहरवार शुभ मुहूर्त और चौघड़िया का महत्व
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, शुभ कार्य के लिए चौघड़िया का विशेष ध्यान रखना आवश्यक होता है। दिल्ली, मुंबई, जयपुर, लखनऊ और गोरखपुर जैसे बड़े शहरों में स्थिर लग्न और शुभ चौघड़िया के समय खरीदारी करने से सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है। पंचांग के अनुसार, व्यापारियों और गृहस्थों के लिए शाम के समय ‘लाभ’ और ‘अमृत’ की चौघड़िया में खरीदारी करना अत्यंत कल्याणकारी माना गया है। विशेषज्ञों का सुझाव है कि वृषभ लग्न के दौरान की गई खरीदारी लंबे समय तक लाभ प्रदान करती है।
पूजा विधि और घर पर नियम
धनतेरस के दिन सायंकाल में मुख्य द्वार पर दीप प्रज्वलित करना और यम के नाम का दीपक जलाना शुभ माना जाता है। घर के मंदिर में भगवान धन्वंतरि और माता लक्ष्मी की प्रतिमा को गंगाजल से शुद्ध करके स्थापित करें। पूजा के दौरान धूप, दीप, नैवेद्य और पुष्प अर्पित करें। मान्यता है कि इस दिन धनिया के बीज और नई झाड़ू की खरीदारी करना शुभ होता है, जिससे घर की दरिद्रता दूर होती है।
स्थानीय निवासियों के लिए सुझाव
बाजारों में भारी भीड़ होने की संभावना को देखते हुए निवासियों को सलाह दी जाती है कि वे अपने शहर के अनुसार शुभ मुहूर्त का पहले से ही चयन कर लें। वाहन या सोने-चांदी की खरीदारी के लिए अपने नजदीकी पंचांग केंद्र या स्थानीय पंडित से सटीक समय की पुष्टि करना भी उचित रहेगा। यातायात को ध्यान में रखते हुए मुख्य बाजारों में भीड़ से बचने के लिए सुबह के शुभ समय का उपयोग करना बेहतर विकल्प साबित हो सकता है। पूजा के दौरान घर को स्वच्छ रखें और सात्विक वातावरण बनाए रखें ताकि त्योहार की दिव्यता बनी रहे।