डोल मेला डीजे विवाद: पुलिस कार्रवाई पर खड़े हुए सवाल
कुशीनगर जिले के हाटा कोतवाली क्षेत्र में हाल ही में आयोजित डोल मेले के दौरान डीजे बजाने के मामले ने अब तूल पकड़ लिया है। मेले में डीजे संचालन के आरोप में आयोजकों और संचालकों के खिलाफ दर्ज मुकदमे को लेकर विश्व हिंदू महासंघ ने कड़ा विरोध जताया है। संगठन के जिला उपाध्यक्ष प्रतीक बरनवाल ने इसे प्रशासनिक विफलता का परिणाम बताते हुए कहा कि यदि प्रशासन ने समय रहते हस्तक्षेप किया होता, तो आज यह स्थिति पैदा नहीं होती।
प्रशासन की कार्यशैली पर उठाए सवाल
रविवार को हाटा डाक बंगले पर एकत्रित हुए विश्व हिंदू महासंघ के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने प्रशासन के खिलाफ अपना आक्रोश व्यक्त किया। जिला उपाध्यक्ष प्रतीक बरनवाल ने स्पष्ट किया कि प्रशासन को जो भी कानूनी कार्रवाई करनी थी, वह डीजे बजने से पहले ही की जानी चाहिए थी। उन्होंने सवाल उठाया कि कार्यक्रम संपन्न होने के बाद पीछे से मुकदमे दर्ज करना युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। कार्यकर्ताओं का कहना है कि यदि ध्वनि विस्तारक यंत्रों या डीजे को लेकर कोई स्पष्ट दिशा-निर्देश थे, तो प्रशासन को उन्हें आयोजन स्थल पर ही लागू करना चाहिए था।
संगठन ने की कानूनी पैरवी की घोषणा
प्रतीक बरनवाल ने ऐलान किया कि विश्व हिंदू महासंघ इस मामले में नामजद किए गए सभी युवाओं के साथ पूरी मजबूती से खड़ा है। उन्होंने कहा, ‘संगठन इन भगवाधारी साथियों के मामले की कानूनी पैरवी करेगा और किसी भी युवा का भविष्य खराब नहीं होने देगा।’ विरोध प्रदर्शन में शामिल कार्यकर्ताओं ने कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन की जिम्मेदारी है, लेकिन कार्रवाई का तरीका ऐसा नहीं होना चाहिए जिससे स्थानीय युवाओं को अनावश्यक कानूनी उलझनों का सामना करना पड़े। इस प्रदर्शन के दौरान अरुण सिंह, मिन्टू राव, कौशल मणि, अंकुर राव, सन्नी गुप्ता, चन्दन और प्रिंस सहित दर्जनों पदाधिकारी और समर्थक मौजूद थे।
मामले की वर्तमान स्थिति
डोल मेला प्रकरण अब केवल एक सामान्य विवाद नहीं रहा, बल्कि यह प्रशासनिक स्तर पर निर्णय लेने की प्रक्रिया और सार्वजनिक आयोजनों में सरकारी हस्तक्षेप को लेकर बहस का विषय बन गया है। फिलहाल, पुलिस और प्रशासन की ओर से इस मामले में कोई नई प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन विश्व हिंदू महासंघ ने स्पष्ट कर दिया है कि वे मामले को लेकर कानूनी लड़ाई लड़ने के लिए तैयार हैं। प्रशासन के लिए अब चुनौती यह है कि वह कानून का पालन सुनिश्चित करने के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर बढ़ते असंतोष को कैसे शांत करता है।