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कुशीनगर: बिना चार्ज लिए 25 लाख का भुगतान, जांच रिपोर्ट पर उठे गंभीर सवाल

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कटाई भरपुरवा पंचायत में वित्तीय अनियमितता का मामला

कुशीनगर जिले के खड्डा विकास खंड अंतर्गत ग्राम पंचायत कटाई भरपुरवा में सरकारी धन के दुरुपयोग का एक गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि ग्राम पंचायत अधिकारी पवन कुमार सिंह ने विधिवत चार्ज ग्रहण करने से तीन महीने पहले ही लगभग 25 लाख रुपये का भुगतान कर दिया। यह मामला सामने आने के बाद से ही पंचायत विभाग की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लग गए हैं।

क्या है पूरा घटनाक्रम?

प्राप्त जानकारी के अनुसार, ग्राम पंचायत अधिकारी पवन कुमार सिंह को 30 जून 2025 को नियुक्ति मिली थी। इसके महज 16 दिन बाद, 16 जुलाई 2025 को उन्होंने गांव के विकास कार्यों के मद में 25 लाख रुपये का भुगतान कर दिया। वहीं, आधिकारिक रिकॉर्ड के मुताबिक उन्हें उक्त ग्राम पंचायत का विधिवत चार्ज 9 अक्टूबर 2025 को सौंपा गया। बिना चार्ज लिए इतनी बड़ी राशि का भुगतान होना नियमों के प्रति गंभीर लापरवाही को दर्शाता है।

जांच प्रक्रिया और डीपीआरओ की भूमिका पर सवाल

इस अनियमितता की शिकायत जिलाधिकारी के पास पहुंचने के बाद जांच के आदेश दिए गए थे। तत्कालीन जिलाधिकारी ने डीपीआरओ को मामले की निष्पक्ष जांच कर कार्रवाई करने का निर्देश दिया था। हालांकि, शिकायतकर्ता का आरोप है कि जांच अधिकारी ने मामले की गहराई से पड़ताल करने के बजाय उसे मैनेज करने का प्रयास किया और औपचारिकता पूरी कर रिपोर्ट फाइल कर दी।

बड़े सवाल जो जांच के घेरे में हैं

स्थानीय स्तर पर अब कई सवाल उठ रहे हैं जो प्रशासन के लिए चुनौती बने हुए हैं:

  • बिना विधिवत चार्ज लिए भुगतान की प्रक्रिया किस आधार पर पूरी की गई?
  • ई-ग्राम स्वराज पोर्टल पर किस डिजिटल लॉगिन आईडी का उपयोग करके यह भुगतान किया गया?
  • भुगतान से पूर्व बिल-वाउचर और कार्यों का भौतिक सत्यापन किसने किया?
  • जांच अधिकारी ने किन साक्ष्यों के आधार पर इसे ‘लीपापोती’ की श्रेणी में डाल दिया?

प्रशासन की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवाल

इस मामले में न केवल भुगतान करने वाले अधिकारी की भूमिका संदेहास्पद है, बल्कि जांच के नाम पर की गई लीपापोती ने विभागीय अधिकारियों की कार्यशैली को भी कठघरे में खड़ा कर दिया है। यदि सरकारी धन का गबन हुआ है, तो इसकी जिम्मेदारी तय करना प्रशासन के लिए अनिवार्य हो गया है। फिलहाल स्थानीय ग्रामीण और जागरूक नागरिक अब जिलाधिकारी से मामले की दोबारा उच्च स्तरीय जांच और दोषियों पर कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

(संवाददाता)

संवाददाता के संपादक

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