हाटा में सरकारी व्यवस्थाओं पर सख्त प्रशासन
कुशीनगर जिले के हाटा ब्लॉक में प्रशासनिक व्यवस्थाओं को चुस्त-दुरुस्त करने के उद्देश्य से जॉइंट मजिस्ट्रेट एवं उप जिलाधिकारी (SDM) IAS मयंक त्रिपाठी ने औचक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने 15 बेड के आयुर्वेद चिकित्सालय और बाल विकास परियोजना कार्यालय का जायजा लिया, जहां कई महत्वपूर्ण खामियां सामने आई हैं। निरीक्षण के समय तहसीलदार जया सिंह और नायब तहसीलदार सहित अन्य विभागीय अधिकारी भी साथ मौजूद थे।
आयुर्वेद चिकित्सालय में अनुपस्थिति और अव्यवस्था
आयुर्वेद चिकित्सालय के निरीक्षण के दौरान चिकित्साधिकारी डॉ. प्रियंका सिंह मौके पर अनुपस्थित पाई गईं। स्टाफ नर्स और फार्मासिस्ट ने स्पष्ट किया कि चिकित्साधिकारी तीन महीने के चाइल्ड केयर लीव (CCL) पर हैं। हालांकि, औचक निरीक्षण के दौरान जब उपस्थिति रजिस्टर की गहन जांच की गई, तो उसमें बीच-बीच में उनकी उपस्थिति दर्ज होना पाया गया, जिसे लेकर अधिकारियों ने असंतोष जताया।
इसके अतिरिक्त, चिकित्सालय में दवाओं के रखरखाव को लेकर गंभीर लापरवाही दिखी। स्टॉक रजिस्टर में दवाओं का सही ब्योरा दर्ज नहीं था और पूरी व्यवस्था केवल स्टाफ नर्स और फार्मासिस्ट के भरोसे चलती मिली। जॉइंट मजिस्ट्रेट ने चिकित्साधिकारी की स्वीकृत अवकाश की अवधि और प्रक्रिया का पूरा विवरण तत्काल उपलब्ध कराने का आदेश दिया है।
बाल विकास परियोजना में मांगा सामग्री वितरण का हिसाब
चिकित्सालय के बाद IAS मयंक त्रिपाठी ने बाल विकास परियोजना कार्यालय का औचक निरीक्षण किया। यहां सीडीपीओ मौजूद थीं। निरीक्षण के दौरान कार्यालय में मौजूद विभिन्न सामग्रियों के स्टॉक को देखा गया। उप जिलाधिकारी ने कड़े निर्देश देते हुए आंगनबाड़ी केंद्रों को भेजी गई और वर्तमान में बची हुई सामग्री का विस्तृत विवरण तलब किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सामग्री का वितरण पारदर्शी होना चाहिए और इसका पूरा रिकॉर्ड मेंटेन किया जाना अनिवार्य है।
एक सप्ताह का अल्टीमेटम और आगे की कार्रवाई
दोनों ही कार्यालयों में पाई गई अनियमितताओं को लेकर IAS मयंक त्रिपाठी ने संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को एक सप्ताह का समय दिया है। इस अवधि के भीतर सभी व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने और मांगी गई रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि एक सप्ताह के बाद पुनः औचक निरीक्षण किया जाएगा। यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर कमियां दूर नहीं की गईं, तो दोषी पाए जाने वाले कर्मचारियों और अधिकारियों के खिलाफ नियमानुसार कड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी।