त्योहारों के बीच यात्रियों की बढ़ी मुसीबत
महराजगंज शहर में धनतेरस से शुरू हुए त्योहारों के मद्देनजर जिला प्रशासन द्वारा भारी वाहनों के प्रवेश पर लगाई गई ‘नो एंट्री’ व्यवस्था ने बाहर से घर लौटने वाले यात्रियों के लिए बड़ी कठिनाई पैदा कर दी है। त्योहारों के इस सीजन में दिल्ली, मुंबई और गोरखपुर से आने वाली बसों को शहर के बाहरी इलाके शिकारपुर में ही रोका जा रहा है, जिससे यात्रियों को गंतव्य तक पहुंचने के लिए भारी जद्दोजहद करनी पड़ रही है।
आठ किलोमीटर का सफर और यातायात का संकट
शिकारपुर से शहर के मुख्य बस स्टेशन तक की दूरी लगभग आठ किलोमीटर है। ‘नो एंट्री’ के कारण बसें शहर के अंदर नहीं जा पा रही हैं, जिसके चलते यात्रियों को अपने भारी सामान के साथ टेंपो या अन्य छोटे वाहनों का सहारा लेना पड़ रहा है। सबसे गंभीर स्थिति शाम ढलने के बाद उत्पन्न हो रही है। स्थानीय निवासियों और यात्रियों के अनुसार, सूर्यास्त के बाद बैकुण्ठपुर से शहर तक के लिए ऑटो-टेंपो मिलना अत्यंत कठिन हो जाता है, जिससे यात्री सड़क पर घंटों भटकने को मजबूर हैं।
महंगे निजी वाहनों का सहारा
परिवहन की इस किल्लत का सीधा असर यात्रियों की जेब पर पड़ रहा है। सार्वजनिक परिवहन की कमी के कारण कई यात्रियों को महंगे दामों पर निजी वाहन बुक करने पड़ रहे हैं। दिल्ली से ठूठीबारी की यात्रा कर रहे राजेश, संध्या, सोनम और रामप्रसाद जैसे यात्रियों ने बताया कि वे गोरखपुर तक तो आसानी से पहुंच गए, लेकिन वहां से महराजगंज रूट पर उन्हें बैकुण्ठपुर में ही उतार दिया गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि बस स्टेशन पर पहुंचने के बाद भी उन्हें आगे की यात्रा के लिए बसों की समय-सारणी या उपलब्धता के बारे में कोई सटीक जानकारी नहीं मिल रही है, जिससे भ्रम की स्थिति बनी हुई है।
प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल
त्योहारों के दौरान यात्रियों की संख्या को देखते हुए प्रशासन को वैकल्पिक व्यवस्था करनी चाहिए थी, लेकिन वर्तमान में यात्री बिना किसी सहायता के भटक रहे हैं। शहर के व्यस्त बाजार क्षेत्रों में यातायात नियंत्रण के लिए लागू यह नो एंट्री, अब आम यात्रियों के लिए असुविधा का कारण बन गई है। फिलहाल, प्रशासन की ओर से इस संदर्भ में कोई अतिरिक्त बस सेवा या सुगम परिवहन सहायता का ऐलान नहीं किया गया है, जिसके कारण लोगों को दीपावली के पर्व पर अपने घर पहुंचने के लिए भारी मशक्कत करनी पड़ रही है।