महराजगंज में एनपीके की कीमतों में भारी उछाल
महराजगंज जनपद में रबी सीजन की तैयारी के बीच किसानों पर महंगाई की मार पड़ी है। चालू फसल चक्र में एनपीके खाद की कीमतों में प्रति बोरी 500 रुपये तक की वृद्धि दर्ज की गई है। पिछले साल जो एनपीके की 50 किलो की बोरी 1950 रुपये में उपलब्ध थी, वह इस बार 2450 रुपये में मिल रही है। रबी की मुख्य फसल गेहूं की बोआई के लिए यह खाद अनिवार्य मानी जाती है, जिससे किसानों की उत्पादन लागत बढ़ने की चिंता बढ़ गई है।
क्यों महंगे हुए एनपीके के दाम
कृषि विभाग और सहकारी अधिकारियों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार में अमोनिया, सल्फर, सल्फ्यूरिक एसिड और फॉस्फोरिक एसिड जैसे कच्चे माल की उपलब्धता कम होने और मांग बढ़ने से कीमतों में यह बदलाव आया है। एआर कोआपरेटिव सुनील गुप्ता ने स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे माल की कीमतों में आई तेजी का सीधा असर उर्वरकों के खुदरा मूल्यों पर पड़ा है। भारतीय किसान यूनियन के जिलाध्यक्ष राम आशीष का कहना है कि बुवाई के समय ही एनपीके की सबसे अधिक आवश्यकता होती है, ऐसे में बढ़ी हुई कीमतें किसानों के मुनाफे को सीधा प्रभावित करेंगी।
जनपद में खाद की उपलब्धता और स्थिति
जिला कृषि अधिकारी शैलेंद्र प्रताप सिंह के अनुसार, जनपद में रबी सीजन के लिए उर्वरकों की कुल उपलब्धता पर्याप्त है। रबी वर्ष 2026-27 के लिए जनपद में 7974 मीट्रिक टन एनपीके खाद का लक्ष्य निर्धारित किया गया था, जिसके सापेक्ष अब तक 8139 मीट्रिक टन उपलब्ध कराई जा चुकी है। 28 अक्टूबर 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार, कुल 859 मीट्रिक टन एनपीके का वितरण किया जा चुका है।
- यूरिया: कुल स्टॉक 27,536 मीट्रिक टन
- डीएपी: कुल स्टॉक 5,796 मीट्रिक टन
- एनपीके: कुल स्टॉक 7,280 मीट्रिक टन
जिला कृषि अधिकारी ने स्पष्ट किया है कि यूरिया और डीएपी के रेट पूर्ववत हैं और केवल एनपीके की कीमतों में गुणवत्ता के आधार पर 300 से 500 रुपये तक की वृद्धि हुई है। उन्होंने किसानों को सलाह दी है कि वे फार्मर रजिस्ट्री में दर्ज विवरण के आधार पर सहकारी समितियों या अधिकृत निजी दुकानों से खाद खरीद सकते हैं।
किसानों की मांग और चिंताएं
धान की कटाई के बाद किसान गेहूं की बोआई के लिए खेतों को तैयार कर रहे हैं। बैजनाथ और विनोद जैसे स्थानीय किसानों ने बताया कि बढ़ती लागत के कारण उन्हें खाद के उपयोग की मात्रा में कटौती करने पर मजबूर होना पड़ रहा है। किसानों ने शासन से एनपीके पर दी जाने वाली सब्सिडी बढ़ाने की मांग की है ताकि खेती को लाभ का सौदा बनाया जा सके। जिले में गेहूं का कुल रकबा 1,43,900 हेक्टेयर है, और धान की कटाई के बाद खेतों में मौजूद नमी बुआई के लिए अनुकूल बनी हुई है, लेकिन खाद की बढ़ती कीमतें खेती की तैयारियों पर भारी पड़ रही हैं।