डिजिटल प्लेटफार्म पर परिवहन विभाग की सख्त निगरानी
महाराजगंज जिले में अब डिजिटल प्लेटफार्म के माध्यम से यात्री परिवहन और सामान की डिलीवरी करने वाली कंपनियों पर परिवहन विभाग की सीधी नजर रहेगी। उत्तर प्रदेश मोटरयान (समूहक और वितरण सेवा प्रदाता) नियमावली-2026 के लागू होने के बाद, अब सभी एग्रीगेटर, डिलीवरी सेवा प्रदाता और ई-कॉमर्स इकाइयों के लिए परिवहन विभाग से लाइसेंस लेना अनिवार्य कर दिया गया है।
यूपी माई फ्लीट पोर्टल से होगी लाइसेंस प्रक्रिया
इस नई व्यवस्था के तहत, राज्य सरकार ने ‘यूपी माई फ्लीट’ (UP My Fleet) पोर्टल लॉन्च किया है। एआरटीओ डॉ. दिलीप कुमार गुप्ता ने बताया कि इस पोर्टल के माध्यम से ही सभी संबंधित इकाइयों को अपना पंजीकरण कराना होगा। लाइसेंस प्रक्रिया पूरी करने की जिम्मेदारी एआरटीओ कार्यालय को दी गई है। इन कंपनियों को पोर्टल पर कंपनी का नाम, पंजीकरण संख्या, जीएसटी नंबर, पैन, पंजीकृत पता और वेबसाइट जैसे महत्वपूर्ण विवरण दर्ज करने होंगे।
इन कंपनियों पर लागू होंगे नियम
परिवहन विभाग के अनुसार, इस नियमावली के दायरे में निम्नलिखित इकाइयां आएंगी:
- वे एग्रीगेटर जो डिजिटल प्लेटफार्म के जरिए दो, तीन या चार पहिया यात्री वाहनों को सेवा के लिए जोड़ते हैं।
- डिलीवरी सेवा प्रदाता जो माल ढुलाई के लिए वाहनों का उपयोग करते हैं।
- ई-कॉमर्स इकाइयां जो प्रदेश के भीतर अपने प्लेटफार्म से जुड़े वाहनों के माध्यम से सामान की डिलीवरी करती हैं।
सुरक्षा और जवाबदेही होगी सुनिश्चित
बिना लाइसेंस के संचालन करने वाली इकाइयों के खिलाफ विभाग नियमानुसार सख्त कार्रवाई करेगा। एआरटीओ डॉ. दिलीप कुमार गुप्ता ने स्पष्ट किया कि जो इकाइयां पहले से संचालित हैं, उन्हें एक निर्धारित अवधि के भीतर लाइसेंस लेना होगा, जबकि नई इकाइयों को अपना काम शुरू करने से पहले अनिवार्य रूप से पंजीकरण कराना होगा। इस पोर्टल को ‘वाहन’ और ‘सारथी’ प्लेटफार्म से एकीकृत किया गया है, जिससे वाहनों और चालकों का सत्यापन आसान हो जाएगा। इस नई व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य यात्रियों और डिलीवरी कर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना तथा परिवहन सेवाओं में जवाबदेही तय करना है।