सोनौली सीमा पर बहाल हुआ आवागमन
नेपाल में पिछले 20 दिनों से बाढ़ और भूस्खलन के कारण बंद पड़े काठमांडो-मुग्लिंग मार्ग के बुधवार को खुलने से सोनौली सीमा पर यातायात व्यवस्था में सुधार हुआ है। मार्ग के बहाल होते ही सीमा पर पिछले करीब 15 दिनों से फंसी मालवाहक ट्रकों की लंबी कतारों में राहत देखी जा रही है। सीमा पर ट्रकों का जमावड़ा घटकर अब लगभग चार किलोमीटर तक सीमित रह गया है, जिससे ट्रांसपोर्टरों और व्यापारियों ने बड़ी राहत महसूस की है।
व्यापार और परिवहन पर पड़ा था असर
मार्ग बंद होने के कारण काठमांडो घाटी तक आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति पूरी तरह बाधित हो गई थी। स्थानीय ट्रांसपोर्ट संचालक नरेंद्र सिंह के अनुसार, स्थिति इतनी खराब थी कि नेपाल के कारोबारियों ने माल की नई बुकिंग तक रोक दी थी। कई मालवाहक ट्रकों को सोनौली सीमा के आसपास ही रोकना पड़ा था और कुछ मामलों में सामान को गोदामों में उतारकर खाली ट्रकों को वापस भेजना पड़ा था। काठमांडो तक पहुंचने के लिए वैकल्पिक मार्ग के रूप में हेटौंडा होकर लगभग 400 किलोमीटर की लंबी दूरी तय करनी पड़ रही थी, जबकि सामान्य मार्ग की लंबाई 280 किलोमीटर है।
पर्यटन क्षेत्र पर पड़ा नकारात्मक प्रभाव
सड़क मार्ग के बंद होने का सबसे बुरा असर भारत-नेपाल पर्यटन कारोबार पर पड़ा। सामान्य दिनों में सोनौली सीमा से करीब एक हजार पर्यटक वाहन रोजाना नेपाल में प्रवेश करते थे, लेकिन आपदा के दौरान यह संख्या 80 फीसदी तक गिरकर मात्र 200 के आसपास रह गई थी। सोटो (SOTO) के अध्यक्ष श्रीचंद गुप्ता ने बताया कि काठमांडो, पोखरा और मुक्तिनाथ के पर्यटक पैकेज सबसे अधिक प्रभावित हुए थे। मार्ग की बदहाली के कारण पर्यटकों ने लुम्बिनी, भैरहवा और बुटवल जैसे नजदीकी स्थलों तक ही अपनी यात्रा सीमित कर ली थी।
कारोबार के पटरी पर लौटने की उम्मीद
काठमांडो-मुग्लिंग मार्ग के सामान्य होने से अब व्यापारिक गतिविधियों के तेजी से पटरी पर लौटने की उम्मीद जताई जा रही है। अधिकारियों और स्थानीय व्यापार संघों के अनुसार, काठमांडो घाटी में माल की निरंतर आपूर्ति शुरू होने से सोनौली सीमा पर ट्रकों का दबाव धीरे-धीरे पूरी तरह समाप्त हो जाएगा। मार्ग बहाली के बाद अब पर्यटन क्षेत्र से जुड़े लोगों को भी पर्यटकों की संख्या में वृद्धि होने की प्रबल संभावना है, जिससे सीमावर्ती क्षेत्रों की आर्थिक स्थिति में सुधार होगा।