महराजगंज पुलिस की जांच में जार्डन के मोबाइल से खुल सकते हैं अहम राज
नेपाल बॉर्डर से 11 जुलाई को गिरफ्तार किए गए अंतरराष्ट्रीय भगोड़े जार्डन के खिलाफ महराजगंज पुलिस ने कानूनी शिकंजा और कस दिया है। पुलिस को गिरफ्तारी के समय जार्डन के पास से दो क्षतिग्रस्त मोबाइल फोन मिले थे। अब इन फोनों में छिपे डिजिटल सबूत मामले की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। पुलिस ने पहले फोन का 80 फीसदी डेटा रिकवर कर लिया है, जबकि दूसरे फोन को गहन जांच के लिए चंडीगढ़ स्थित विधि विज्ञान प्रयोगशाला (FSL) भेजा गया है।
डिजिटल साक्ष्यों पर पुलिस का पूरा जोर
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, जार्डन ने अपनी गिरफ्तारी से पहले सबूत मिटाने के उद्देश्य से अपने दोनों मोबाइल फोनों को बुरी तरह तोड़ दिया था। महराजगंज की साइबर सेल ने तत्परता दिखाते हुए पहले फोन का लगभग 80 प्रतिशत डेटा सफलतापूर्वक रिकवर कर लिया है। इस डेटा से जार्डन के संदिग्ध संपर्कों, तत्कालीन लोकेशन और कई महत्वपूर्ण चैट के सुराग मिले हैं। वहीं, दूसरा फोन अत्यधिक क्षतिग्रस्त होने के कारण स्थानीय स्तर पर उसकी जांच संभव नहीं थी, जिसके चलते उसे चंडीगढ़ की सेंट्रल एफएसएल लैब भेजा गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि एडवांस टूल की मदद से चिप से डेटा निकालने पर जार्डन की आपराधिक गतिविधियों के और भी पुख्ता सबूत हाथ लग सकते हैं।
चार्जशीट और 28 सितंबर को होने वाली सुनवाई
मामले में साक्ष्यों को अभेद्य बनाने के लिए पुलिस ने अपनी चार्जशीट में विशेष सतर्कता बरती है। चार्जशीट में कुल सात गवाहों के बयान शामिल किए गए हैं, जिनमें बॉर्डर पर तैनात आव्रजन अधिकारी, गिरफ्तारी करने वाली टीम, साइबर एक्सपर्ट और जार्डन की एक महिला मित्र शामिल हैं। इन सभी गवाहों ने जरूरत पड़ने पर अदालत में उपस्थित होने की लिखित सहमति दी है।
डिप्टी चीफ (लीगल एड डिफेंस काउंसिल), आशुतोष पांडेय के अनुसार, इस मामले की आगामी सुनवाई 28 सितंबर को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट महराजगंज की अदालत में निर्धारित है। उन्होंने बताया कि सरकारी वकील ने कोर्ट को जार्डन के दूसरे फोन के चंडीगढ़ भेजे जाने की जानकारी दी है। वर्तमान में जार्डन दिल्ली के तिहाड़ जेल में बंद है, और 28 सितंबर को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (VC) के जरिए उसकी पेशी की तैयारी की गई है। जार्डन पर आव्रजन और विदेशी अधिनियम 2025 के साथ-साथ धोखाधड़ी की गंभीर धाराएं दर्ज हैं।