शिक्षा विभाग की अनूठी पहल: स्कूलों में विकसित होंगे किचन और मेडिसिनल गार्डन
महराजगंज जिले के शैक्षणिक माहौल को प्रकृति और पोषण से जोड़ने की दिशा में प्रशासन ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। जनपद के सभी 25 पीएम श्री स्कूलों में अब ‘औषधि एवं पोषण वाटिका’ विकसित की जाएगी। इस पहल का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को भोजन में पोषण के महत्व, औषधीय पौधों के गुणों और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करना है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए प्रत्येक विद्यालय को 20-20 हजार रुपये की धनराशि आवंटित की गई है, जिससे कुल 5 लाख रुपये का बजट जारी किया गया है।
विद्यार्थियों के लिए विशेष कक्षाएं और आधुनिक तकनीक का उपयोग
बेसिक शिक्षा विभाग के सामुदायिक सहभागिता जिला समन्वयक दिव्य पांडेय ने जानकारी देते हुए बताया कि इन वाटिकाओं में बच्चों के लिए प्रत्येक सप्ताह एक विशेष कक्षा संचालित की जाएगी। यह कक्षा पूरी तरह से व्यावहारिक अनुभव पर आधारित होगी, जहां बच्चे पौधों की पहचान करने से लेकर उनकी वृद्धि का रिकॉर्ड रखने तक की गतिविधियों में भाग लेंगे।
इन वाटिकाओं की सबसे बड़ी विशेषता आधुनिक तकनीक का समावेश है। पौधों की जानकारी के लिए ‘प्लांटनेट’ और ‘ब्लासम’ वेबसाइट की मदद ली जाएगी। वाटिका के प्रत्येक औषधीय पौधे पर एक क्यूआर कोड (QR Code) चस्पा किया जाएगा। इसे स्कैन करते ही छात्र पौधे का वैज्ञानिक नाम, उसका औषधीय गुण, उपयोग और अन्य महत्वपूर्ण विवरण अपने मोबाइल या टैबलेट पर देख सकेंगे।
स्कूलों की उपलब्धता के आधार पर अलग-अलग मॉडल
शिक्षा विभाग ने निर्देश दिए हैं कि वाटिका का विकास स्कूल परिसर में उपलब्ध जगह के आधार पर किया जाएगा। यदि किसी स्कूल में जमीन की कमी है, तो वहां:
- वर्टिकल गार्डन (Vertical Garden)
- कांपैक्ट गार्डन
- पॉट गार्डन (गमलों में खेती)
- रेज्ड बेड मॉडल
जैसे विकल्पों को अपनाया जाएगा। इन गार्डन में तुलसी, गिलोय, अश्वगंधा, एलोवेरा, नीम और आंवला जैसे औषधीय पौधों के साथ-साथ धनिया, पालक और मेथी जैसी सब्जियां भी उगाई जाएंगी।
स्वास्थ्य और पर्यावरण के प्रति जागरूकता
जिले के 25 पीएम श्री विद्यालयों में वर्तमान में 7761 विद्यार्थी नामांकित हैं। इन वाटिकाओं में ‘किचन गार्डन’ और ‘एरोमैटिक प्लांट’ कॉर्नर भी बनाए जाएंगे, ताकि बच्चों को शुद्ध और पोषणयुक्त आहार के महत्व को सिखाया जा सके। विभाग के अनुसार, नवंबर महीने से इन वाटिकाओं में नियमित गतिविधियां शुरू हो जाएंगी। यह पहल न केवल बच्चों को किताबी ज्ञान से बाहर निकालकर व्यावहारिक शिक्षा प्रदान करेगी, बल्कि उनमें स्वास्थ्य और पर्यावरण के प्रति एक गहरी संवेदनशीलता भी विकसित करेगी।