फर्जीवाड़ा रोकने के लिए परिवहन विभाग का बड़ा कदम
महराजगंज जनपद में दिव्यांग यात्रियों द्वारा यात्रा के दौरान फर्जी कार्ड के इस्तेमाल पर लगाम लगाने के लिए उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम ने एक नई और पारदर्शी पहल की शुरुआत की है। अब महराजगंज डिपो की बसों में तैनात परिचालकों के पास मौजूद ईटीआईएम (ETIM) मशीनों को अपडेट कर दिया गया है, जिससे यात्री के यूडीआईडी (UDID) कार्ड की सत्यता की जांच अब डिजिटल तरीके से मौके पर ही हो सकेगी।
कैसे काम करेगी नई व्यवस्था
इस नई तकनीक के तहत, अब दिव्यांग यात्रियों को अपना यूडीआईडी कार्ड परिचालक को दिखाना होगा। परिचालक बस में मौजूद ईटीआईएम मशीन के जरिए कार्ड पर बने क्यूआर (QR) कोड को स्कैन करेंगे। स्कैनिंग की प्रक्रिया पूरी होते ही मशीन की स्क्रीन पर यात्री का पूरा विवरण जैसे कि नाम, जन्मतिथि, यूडीआईडी नंबर, दिव्यांगता का प्रकार और उसका प्रतिशत प्रदर्शित हो जाएगा।
परिवहन निगम के अधिकारियों के अनुसार, यह मशीन स्वचालित रूप से दिव्यांगता के प्रतिशत के आधार पर निशुल्क टिकट की पात्रता की जांच करेगी और शून्य मूल्य का टिकट जारी कर देगी। इस व्यवस्था से न केवल टिकट बनाने की प्रक्रिया तेज होगी, बल्कि मानवीय त्रुटि या फर्जीवाड़ा होने की संभावना भी न्यूनतम हो जाएगी।
महराजगंज डिपो में व्यवस्था लागू
महराजगंज डिपो में वर्तमान में कुल 157 दिव्यांग यात्रियों के यूडीआईडी कार्ड रिकॉर्ड में दर्ज हैं। पूर्व की व्यवस्था में परिचालक वे-बिल पर मैनुअल रूप से कार्ड नंबर लिखकर टिकट जारी करते थे, जिसमें समय भी अधिक लगता था और गड़बड़ी की आशंका बनी रहती थी। अब एएफसी पोर्टल पर सभी दिव्यांग यात्रियों का डेटा सुरक्षित रहेगा, जिससे यात्रा का विवरण हर समय सत्यापित किया जा सकेगा।
तकनीकी खराबी पर क्या बोले अधिकारी
इस नई व्यवस्था को लेकर महराजगंज के एआरएम प्रभारी संजय प्रेमी ने जानकारी दी कि डिपो की सभी ईटीआईएम मशीनों को तकनीकी रूप से अपडेट कर दिया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि किसी अपरिहार्य कारणवश क्यूआर कोड स्कैन नहीं हो पाता है, तो यात्रियों को असुविधा से बचाने के लिए उन्हें पहले की तरह ही नियमानुसार निशुल्क यात्रा की सुविधा प्रदान की जाएगी। यह कदम दिव्यांग यात्रियों को बेहतर और सुरक्षित सुविधा प्रदान करने के उद्देश्य से उठाया गया है।