सीमावर्ती क्षेत्रों में नवरात्र की धूम
शारदीय नवरात्र के दूसरे दिन सोमवार, 12 अक्टूबर 2026 को महाराजगंज जिले के भारत-नेपाल सीमावर्ती क्षेत्रों में आध्यात्मिक वातावरण बना रहा। नवरात्र के दूसरे दिन भक्तों ने माता दुर्गा के द्वितीय स्वरूप ‘माता ब्रह्मचारिणी’ की विशेष आराधना की। सुबह से ही खनुआ, हरदीडाली चौराहा, कैथवलिया उर्फ बरगदही सहित आसपास के कई गांव स्थित दुर्गा मंदिरों और पूजा पंडालों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखी गई।
माता ब्रह्मचारिणी की पूजा और महत्व
हरदीडाली चौराहे पर स्थित दुर्गा पूजा पंडाल के पुजारी पंडित सूरज मिश्रा ने माता ब्रह्मचारिणी के स्वरूप का वर्णन करते हुए बताया कि माता का यह स्वरूप त्याग, तपस्या और संयम का प्रतीक है। उन्होंने कहा, ‘माता ब्रह्मचारिणी के एक हाथ में जप की माला और दूसरे हाथ में कमंडल सुशोभित है। श्वेत वस्त्र धारण किए हुए माता का यह रूप भक्तों को सिद्धि और आत्मिक संयम प्रदान करता है।’ भक्तों ने पूरे विधि-विधान से माता की पूजा-अर्चना की और अपने परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की।
सुरक्षा और दर्शन के विशेष इंतजाम
सीमावर्ती क्षेत्र होने के कारण यहाँ सुरक्षा के व्यापक प्रबंध किए गए हैं। एसएसबी (सशस्त्र सीमा बल) की कड़ी चौकसी के बीच नेपाल से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन करने के लिए भारतीय सीमा के मंदिरों में पहुंच रहे हैं। स्थानीय पुलिस प्रशासन ने सभी प्रमुख मंदिरों और पूजा पंडालों के आसपास सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन
विभिन्न पूजा समितियों द्वारा मंदिरों में भजन-कीर्तन, देवी जागरण और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। इन आयोजनों से पूरा सीमावर्ती इलाका भक्तिमय हो गया है। प्रशासन ने शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए स्थानीय लोगों से सहयोग की अपील की है। देर रात तक चलने वाले इन आयोजनों में स्थानीय निवासियों की भागीदारी उत्साहजनक रही है।