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Maharajganj News: सिंघाड़े का उत्पादन घटा, दाम 70 रुपये प्रति किलो पहुंचे

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महराजगंज में सिंघाड़ा उत्पादन में भारी कमी

उत्तर प्रदेश के महराजगंज जिले में इस बार सिंघाड़े की पैदावार में हुई कमी ने आम लोगों की जेब पर असर डाला है। नवरात्र से लेकर दिवाली तक सिंघाड़े की मांग काफी अधिक रहती है, क्योंकि व्रत के दौरान इसे मुख्य फलाहार के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। हालांकि, इस बार बाजार में स्थानीय सिंघाड़े की उपलब्धता कम होने के कारण बाहरी स्रोतों पर निर्भरता बढ़ गई है, जिससे कीमतों में भारी उछाल दर्ज किया गया है।

क्यों बढ़े दाम और क्या है स्थिति?

स्थानीय किसानों और कारोबारियों के अनुसार, पिछले साल की तुलना में इस बार उत्पादन लगभग आधा रह गया है। महराजगंज के चौपरिया, बघौना और सरुआ ताल क्षेत्र सिंघाड़ा उत्पादन के मुख्य केंद्र माने जाते हैं। यहां के स्थानीय किसान मनीष साहनी और अनूप साहनी का कहना है कि इस बार बारिश की कमी और तालाबों में जल स्तर घटने का सीधा असर फसल की पैदावार पर पड़ा है।

पिछले वर्ष जो सिंघाड़ा बाजार में 40 से 45 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से बिक रहा था, इस बार उसके दाम 65 से 70 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गए हैं। उत्पादन कम होने के कारण स्थानीय मांग पूरी करने के लिए व्यापारियों को बाहर के क्षेत्रों से सिंघाड़ा मंगाना पड़ रहा है, जिसकी लागत अधिक होने के कारण खुदरा कीमतों में बढ़ोतरी देखी जा रही है।

जिले के तालाबों की स्थिति

महराजगंज जिले में कुल 3400 पंजीकृत तालाब हैं, जिनमें से 1700 तालाब पट्टे पर आवंटित हैं। इन तालाबों का उपयोग न केवल मत्स्य पालन के लिए किया जाता है, बल्कि ये जलीय फल उत्पादन का भी बड़ा आधार हैं। प्रशासनिक आंकड़ों के अनुसार, ये तालाब कई हेक्टेयर में फैले हैं, जो स्थानीय अर्थव्यवस्था और रोजगार का माध्यम बनते हैं। हालांकि, इस बार प्रतिकूल मौसम ने इन जलीय फलों के उत्पादन चक्र को प्रभावित किया है।

आम उपभोक्ताओं पर प्रभाव

त्योहारी सीजन के दौरान सिंघाड़े की कीमतों में हुई इस वृद्धि से आम उपभोक्ताओं को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। नवरात्र में फलाहार के लिए सिंघाड़े का बड़े पैमाने पर उपयोग होता है, लेकिन बढ़ी हुई कीमतों के कारण मध्यम और निम्न वर्गीय परिवारों के लिए इसे खरीदना महंगा साबित हो रहा है। स्थानीय प्रशासन और संबंधित विभाग के स्तर पर फिलहाल इस मामले में कोई विशेष राहत या हस्तक्षेप की सूचना नहीं है। वर्तमान में बाजार पूरी तरह से बाहरी आपूर्ति और मांग के संतुलन पर निर्भर है।

(संवाददाता)

संवाददाता के संपादक

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