एजुकेटर भर्ती में मेरिट दरकिनार का आरोप
कुशीनगर जिले में एजुकेटर भर्ती प्रक्रिया को लेकर गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। अभ्यर्थियों का दावा है कि चयन प्रक्रिया में शासन द्वारा निर्धारित गाइडलाइन्स का पालन नहीं किया गया और मेरिट सूची को नजरअंदाज कर चुनिंदा अभ्यर्थियों की काउंसलिंग कराई गई। इस मामले ने स्थानीय स्तर पर भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
प्रक्रिया में पारदर्शिता पर उठे सवाल
शासन की गाइडलाइन के अनुसार, संविदा एजेंसी का चयन जेम (GeM) पोर्टल के माध्यम से होना चाहिए और उसके बाद अभ्यर्थियों की सूची के आधार पर जिलास्तरीय समिति को मेरिट तैयार करनी होती है। अभ्यर्थियों का आरोप है कि उन्हें काउंसलिंग की सूचना तक नहीं दी गई, जबकि कुछ चुनिंदा लोगों को बुलाकर प्रक्रिया पूरी कर ली गई।
नियमानुसार काउंसलिंग का आधार मेरिट सूची होनी चाहिए थी, जिसमें शैक्षणिक योग्यताओं के अंकों के आधार पर क्रमबद्ध तरीके से अभ्यर्थियों को विद्यालय चयन का मौका मिलना था। यदि आरोप सही हैं कि सूचना का प्रसार सीमित लोगों तक किया गया, तो यह शासन की पारदर्शी चयन प्रक्रिया के विपरीत है।
विज्ञापन और सूचना प्रणाली पर संशय
इस भर्ती प्रक्रिया का एक और विवादास्पद पहलू अखबारों में प्रकाशित विज्ञापन है। अभ्यर्थियों के अनुसार, एनआईसी (NIC) की वेबसाइट पर जिन समाचार पत्रों में विज्ञापन प्रकाशित होने का दावा किया गया है, वे वास्तव में प्रकाशित ही नहीं हुए। यदि विज्ञापन व्यापक स्तर पर नहीं पहुँचा, तो सभी पात्र अभ्यर्थियों को समान अवसर मिलने पर प्रश्नचिह्न लग जाता है।
जांच की मांग और अगला कदम
फिलहाल ‘पैसे लेकर काउंसलिंग में बुलाने’ जैसे गंभीर आरोप भी चर्चा में हैं, जिनकी स्वतंत्र पुष्टि होना शेष है। जानकार बताते हैं कि यदि जिलाधिकारी की अध्यक्षता वाली चयन समिति द्वारा पूरे मामले की जांच की जाए, तो सच्चाई सामने आ सकती है।
स्थानीय अभ्यर्थियों की मांग है कि प्रशासन को निम्नलिखित बिंदुओं पर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए:
- काउंसलिंग के लिए सूचना किस माध्यम से और किसे भेजी गई?
- क्या काउंसलिंग पूरी तरह से मेरिट क्रम के अनुसार हुई?
- विज्ञापन के वास्तविक प्रकाशन और उसकी पहुंच का रिकॉर्ड क्या है?
- चयनित विद्यालयों की सूची और लाभार्थियों का आधार क्या है?
फिलहाल, स्थानीय स्तर पर शिक्षा विभाग के अधिकारियों से इस संबंध में विस्तृत जवाब की प्रतीक्षा है, ताकि भर्ती प्रक्रिया की विश्वसनीयता बहाल हो सके।