हाटा तहसील में मानवीय संवेदना की मिसाल
कुशीनगर जिले की हाटा तहसील में गुरुवार को प्रशासनिक कार्य के दौरान एक संवेदनशील वाकया देखने को मिला। हाटा के ज्वाइंट मजिस्ट्रेट और उपजिलाधिकारी मयंक त्रिपाठी ने अपने कार्यालय के बाहर एक दिव्यांग व्यक्ति को बैठा देख कर न केवल रुककर उसकी फरियाद सुनी, बल्कि उसे सुरक्षित घर भेजने के लिए अपनी सरकारी गाड़ी भी उपलब्ध कराई।
तहसील परिसर में दिव्यांग की व्यथा
प्राप्त जानकारी के अनुसार, एक दिव्यांग व्यक्ति किसी अदालती मामले के सिलसिले में हाटा तहसील पहुंचा था। वह काफी समय से परिसर में बैठा हुआ था, तभी एसडीएम मयंक त्रिपाठी की नजर उस पर पड़ी। उन्होंने तत्काल अपने सुरक्षाकर्मियों को निर्देश देकर उस व्यक्ति को अपने पास बुलाया और उसकी समस्या के बारे में विस्तार से पूछा।
दिव्यांग व्यक्ति ने बताया कि वह अपने लंबित कोर्ट केस के सिलसिले में यहां आया है और उसे आने-जाने में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। उसने उपजिलाधिकारी से अपनी सुनवाई में तेजी लाने का आग्रह किया ताकि उसे बार-बार तहसील के चक्कर न काटने पड़ें।
तत्काल सुनवाई और घर तक छोड़ने की व्यवस्था
दिव्यांग की परेशानी को गंभीरता से लेते हुए, उपजिलाधिकारी मयंक त्रिपाठी ने संबंधित अधिकारियों को मामले की प्राथमिकता के आधार पर सुनवाई करने के निर्देश दिए। इतना ही नहीं, एसडीएम ने मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए दिव्यांग व्यक्ति को उसके घर तक पहुंचाने का निर्णय लिया।
अधिकारी ने अपनी सरकारी गाड़ी से उसे उसके गांव ‘करमैनी’ तक सुरक्षित भिजवाया। प्रशासनिक अधिकारी की इस पहल ने तहसील में मौजूद अन्य लोगों का दिल जीत लिया और वहां मौजूद स्थानीय निवासियों ने एसडीएम के इस मानवीय व्यवहार की जमकर सराहना की।
प्रशासन का मानवीय चेहरा
स्थानीय लोगों का मानना है कि प्रशासनिक पद पर बैठे अधिकारियों का ऐसा व्यवहार आम नागरिकों का सिस्टम के प्रति भरोसा और अधिक मजबूत करता है। हाटा तहसील में दिनभर एसडीएम के इस कार्य की चर्चा होती रही। यह घटना संदेश देती है कि प्रशासनिक दायित्वों के साथ-साथ असहाय और जरूरतमंदों की मदद करना भी एक लोक सेवक का महत्वपूर्ण कर्तव्य है। फिलहाल, संबंधित दिव्यांग व्यक्ति सुरक्षित अपने घर पहुंच गया है और एसडीएम कार्यालय द्वारा उसके मामले में आगे की कार्यवाही सुनिश्चित की जा रही है।