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कुशीनगर: एसपी केशव कुमार के एक साल में 69 पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई

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कुशीनगर पुलिस महकमे में अनुशासन का नया दौर

कुशीनगर के पुलिस कप्तान केशव कुमार के पिछले एक साल के कार्यकाल के दौरान पुलिस विभाग के भीतर अनुशासनहीनता और भ्रष्टाचार के खिलाफ एक सख्त रुख देखने को मिला है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, इस अवधि में 69 से अधिक पुलिसकर्मियों के खिलाफ निलंबन, लाइनहाजिरी, स्थानांतरण या वेतन कटौती जैसी विभागीय और प्रशासनिक कार्रवाई की गई है। यह आंकड़ा पुलिस कप्तान की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति को दर्शाता है, जिसमें अपराधियों के साथ-साथ अपनी खाकी की जवाबदेही भी प्राथमिकता पर रही है।

विभिन्न मामलों में सख्त विभागीय कार्रवाई

एसपी के कार्यकाल में हुई कार्रवाइयों का दायरा काफी विस्तृत रहा है। अक्टूबर 2025 में एक बड़ी प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत एक ही थाने में तीन साल से अधिक समय से तैनात 29 पुलिसकर्मियों (14 उपनिरीक्षकों को लाइनहाजिर और 15 को स्थानांतरण) को हटाया गया था। इसके बाद जनवरी 2026 में औचक निरीक्षण के दौरान ड्यूटी से नदारद मिले एक दरोगा और दो सिपाहियों को तत्काल प्रभाव से लाइनहाजिर कर दिया गया।

भ्रष्टाचार के आरोपों में भी कई पुलिसकर्मी कार्रवाई की जद में आए हैं। मार्च 2026 में गांजा तस्करों के साथ कथित मिलीभगत के मामले में चार सिपाहियों को निलंबित किया गया। इसी तरह, मई 2026 में शराब दुकानों से अवैध वसूली और ‘महीना’ मांगने के आरोपों की पुष्टि होने के बाद तरयासुजान के प्रभारी निरीक्षक और बहादुरपुर चौकी प्रभारी को निलंबित किया गया।

अगस्त की बड़ी कार्रवाई और वर्तमान स्थिति

अगस्त 2026 में संदिग्ध आचरण रखने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ एक और बड़ा एक्शन लिया गया, जिसमें एक निरीक्षक और चार उपनिरीक्षकों सहित कुल 28 पुलिसकर्मियों को लाइनहाजिर कर दिया गया। साथ ही, बीट रिपोर्टिंग में खराब प्रदर्शन के चलते आठ थानेदारों के एक दिन का वेतन काटने का निर्देश दिया गया। हाल ही में सितंबर 2026 में जनसुनवाई के दौरान मिली शिकायतों के आधार पर नेबुआ नौरंगिया थाने के उपनिरीक्षक संदीप यादव को निलंबित कर जांच सीओ कसया को सौंप दी गई है।

इन कार्रवाइयों का उद्देश्य थानों में जनता की सुनवाई को बेहतर बनाना और पुलिस की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता लाना है। हालांकि, इन मामलों का अंतिम विभागीय निष्कर्ष संबंधित जांच पूरी होने पर ही स्पष्ट हो पाएगा, लेकिन एसपी की इन लगातार कार्रवाइयों ने जिले में विभागीय अनुशासन को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म रखा है।

(संवाददाता)

संवाददाता के संपादक

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