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कुशीनगर: ऐतिहासिक पाठशाला में शिक्षकों का टोटा, एक शिक्षामित्र के भरोसे 5 कक्षाएं

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106 साल पुराने विद्यालय की बदहाली

कुशीनगर के फाजिलनगर स्थित सोहंग प्राथमिक विद्यालय, जिसकी स्थापना 1920 में हुई थी, आज गंभीर संकट से जूझ रहा है। एक सदी से अधिक पुरानी यह पाठशाला, जिसने पूर्व केंद्रीय मंत्री पं. राजमंगल पांडेय और स्वतंत्रता संग्राम सेनानी रामधारी शास्त्री जैसी विभूतियों को शिक्षा दी, आज खुद बुनियादी सुविधाओं और शिक्षकों की कमी से जूझ रही है। वर्तमान में विद्यालय में मात्र 31 छात्र नामांकित हैं, जिनकी पढ़ाई पर अब संकट के बादल मंडरा रहे हैं।

एक शिक्षामित्र के कंधों पर पूरी जिम्मेदारी

विद्यालय में दो सहायक अध्यापिकाएं तैनात हैं, जो वर्तमान में लंबे समय से मातृत्व अवकाश पर हैं। इनमें से एक के पास प्रधानाध्यापिका का प्रभार भी है। इन दोनों के अवकाश पर होने के कारण कक्षा एक से पांच तक के बच्चों को पढ़ाने की पूरी जिम्मेदारी एक मात्र महिला शिक्षामित्र पर आ गई है। ग्रामीणों का आरोप है कि इतने लंबे अवकाश की जानकारी होने के बावजूद शिक्षा विभाग द्वारा अब तक किसी वैकल्पिक शिक्षक की व्यवस्था नहीं की गई है, जिससे बच्चों का शैक्षिक सत्र प्रभावित हो रहा है।

मूलभूत सुविधाओं का अभाव

विद्यालय की स्थिति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पांच कक्षाओं की पढ़ाई महज दो कमरों में सिमट कर रह गई है। इसके अलावा, हाल ही में नवनिर्मित शौचालय पर ताला लटके होने के कारण बच्चे इसका उपयोग नहीं कर पा रहे हैं। विद्यालय में मध्याह्न भोजन के लिए डाइनिंग शेड, हाथ धोने के लिए हैंडवाशिंग यूनिट और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए मंच जैसी बुनियादी सुविधाओं का भी घोर अभाव है। बिजली कटौती के दौरान बच्चों को भीषण गर्मी और उमस में बैठने को मजबूर होना पड़ता है।

ग्रामीणों में रोष और समाधान की मांग

अनीश पांडेय, शहाबुद्दीन अंसारी और रामनरेश सिंह समेत दर्जनों ग्रामीणों ने इस स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की है। ग्रामीणों का कहना है कि शिक्षा विभाग और स्थानीय जनप्रतिनिधियों की उदासीनता के कारण सरकारी स्कूल के प्रति अभिभावकों का विश्वास कम हो रहा है। उन्होंने प्रशासन से तत्काल प्रभाव से वैकल्पिक शिक्षकों की तैनाती करने, शौचालय खुलवाने और विद्यालय में बच्चों के लिए बेहतर शैक्षणिक वातावरण सुनिश्चित करने की मांग की है। अब सबकी निगाहें शिक्षा विभाग के अगले कदम पर टिकी हैं कि वे इस ऐतिहासिक विद्यालय के गौरव को पुनर्जीवित करने के लिए क्या कदम उठाते हैं।

(संवाददाता)

संवाददाता के संपादक

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