गंडक नदी के बढ़ते दबाव से एपी बांध टूटा
कुशीनगर जिले के तमकुहीराज तहसील क्षेत्र में सोमवार देर रात गंडक नदी के बढ़ते जलस्तर और पानी के भारी दबाव के चलते अहिरौलीदान-पिपराघाट (एपी) बांध अचानक टूट गया। ततवा टोला के पास बांध के क्षतिग्रस्त होने से जवही दयाल, नरवाजोत और गौरहा बाजार समेत करीब छह गांवों में बाढ़ का पानी तेजी से घुस गया है। इस घटना के बाद से स्थानीय प्रशासन अलर्ट मोड पर आ गया है और करीब दो दर्जन अन्य गांवों पर बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है।
मुख्यमंत्री के निर्देश पर मौके पर पहुंचे आला अधिकारी
बांध टूटने की सूचना मिलते ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संज्ञान लेते हुए वरिष्ठ अधिकारियों को तुरंत घटनास्थल पर पहुंचने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद गोरखपुर मंडल के कमिश्नर इंद्र विक्रम सिंह, एडीजी रामकुमार, जिलाधिकारी संजय कुमार और पुलिस अधीक्षक केशव कुमार ने देर रात ही एपी बांध के कटे हुए हिस्से का निरीक्षण किया। अधिकारियों ने बचाव कार्य की समीक्षा करते हुए प्रभावितों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित करने और तत्काल राहत सामग्री उपलब्ध कराने के आदेश दिए हैं।
बचाव और राहत कार्य जारी
प्रशासन ने बाढ़ प्रभावित ग्रामीणों के लिए बेदूपार इंटर कॉलेज के मैदान को अस्थायी राहत शिविर के रूप में चिन्हित किया है। मंगलवार सुबह से ही एनडीआरएफ (NDRF) और एसडीआरएफ (SDRF) की टीमें राहत और बचाव कार्य में जुटी हैं। अब तक बाढ़ के पानी में फंसे कई लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जा चुका है। प्रभावित परिवारों तक भोजन के पैकेट और आवश्यक सामग्री पहुंचाने का काम जारी है। वहीं, जिला प्रशासन की ओर से सुरक्षा की दृष्टि से स्थिति पर चौबीसों घंटे निगरानी रखी जा रही है।
बाढ़ बचाव सामग्री की कमी पर ग्रामीणों का रोष
घटनास्थल पर पहुंचे स्थानीय लोगों ने बांध की सुरक्षा व्यवस्था और बचाव सामग्री की कमी को लेकर नाराजगी जाहिर की है। ग्रामीणों का आरोप है कि सोमवार को जब कटान शुरू हुई थी, तब मौके पर पर्याप्त मात्रा में बोल्डर और बालू की बोरियां मौजूद नहीं थीं। हालांकि, प्रशासन द्वारा अब अमवाखास और लक्ष्मीपुर से ट्रॉलियों के माध्यम से पत्थर और बोरियां मंगवाकर कटान रोकने की कोशिशें की जा रही हैं। इस बीच, कटान स्थल पर जनप्रतिनिधियों के पहुंचने के दौरान कुछ अप्रिय स्थिति भी बनी, जिसके चलते पुलिस ने कुछ लोगों को हिरासत में भी लिया है। वर्तमान में जिला प्रशासन बांध को और अधिक कटान से रोकने और प्रभावित गांवों में राहत पहुंचाने को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रहा है।