Monday, 2 November 2026 | पूर्वांचल संस्करण • कुशीनगर केंद्रबिंदु
🔴 24x7 लाइव न्यूज़ डेस्क
• कुशीनगर, देवरिया, गोरखपुर, महराजगंज, गोपालगंज
हाइपरलोकल न्यूज़ प्लेटफॉर्म • निष्पक्ष • प्रामाणिक • सबसे पहले

कुशीनगर: सुभाष यादव की नियुक्ति और पदोन्नति की जांच शुरू, शासन ने मांगे रिकॉर्ड

🎙️ खबर सुनें (AI वॉइस रीडर)

मामले की पृष्ठभूमि और शासन के निर्देश

कुशीनगर जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय में तैनात वरिष्ठ सहायक सुभाष यादव की नियुक्ति, समायोजन और पदोन्नति का मामला अब शासन के रडार पर आ गया है। इस प्रकरण को लेकर लंबे समय से उठ रहे सवालों और शिकायतों के बाद, शिक्षा निदेशालय ने मामले का संज्ञान लेते हुए विस्तृत जांच के निर्देश दिए हैं। सहायक शिक्षा निदेशक (बेसिक), प्रयागराज ने 7 सितंबर 2026 को जारी एक महत्वपूर्ण पत्र के माध्यम से सुभाष यादव की संपूर्ण सेवा अवधि के अभिलेखों की प्रमाणित प्रतियां तलब की हैं।

जांच का दायरा: नियुक्ति से पदोन्नति तक का रिकॉर्ड

शासन द्वारा मांगी गई रिपोर्ट में वर्ष 1989 से शुरू हुई सेवा यात्रा का गहन परीक्षण किया जाएगा। निदेशालय ने विशेष रूप से निम्नलिखित दस्तावेजों की मांग की है:

  • नियुक्ति संबंधी अभिलेख: 6 अक्टूबर 1989 को हुई नियुक्ति से जुड़े मूल दस्तावेज।
  • समायोजन विवरण: नियुक्ति के बाद पद और स्थान के समायोजन से संबंधित आदेश।
  • पदोन्नति रिकॉर्ड: वरिष्ठ सहायक पद तक की पदोन्नति का आधार और सक्षम प्राधिकारी के आदेश।
  • सेवा पंजिका: पूरी सेवा अवधि का आधिकारिक विवरण।

इस जांच में यह स्पष्ट करने का प्रयास किया जाएगा कि 1989 में परिचारक के पद पर हुई नियुक्ति के बाद किस नियम और प्रक्रिया के तहत उनका समायोजन और पदोन्नति हुई। शासन को भेजी गई पूर्ववर्ती सूचनाओं में नियुक्ति तिथि को लेकर विसंगतियां (कहीं 1989 तो कहीं 1991) सामने आई हैं, जो जांच का एक मुख्य केंद्र बिंदु होंगी।

विभागीय हलचल और वर्तमान स्थिति

यह जांच ऐसे समय पर शुरू हुई है जब सुभाष यादव का स्थानांतरण भी चर्चा का विषय बना हुआ है। बलिया स्थानांतरण आदेश के बावजूद उन्हें कार्यमुक्त न किए जाने को लेकर पहले ही सवाल उठाए जा रहे थे। अब नियुक्ति रिकॉर्ड की जांच के निर्देश ने विभागीय गलियारों में हलचल बढ़ा दी है। निदेशालय ने इस मामले में उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ, कुशीनगर के सदस्य जनार्दन मिश्र द्वारा 6 अप्रैल 2026 को की गई शिकायत का हवाला दिया है, जिसके बाद से ही प्रशासन पर दबाव बढ़ गया था।

जांच के निहितार्थ

अब मामला पूरी तरह से प्रशासनिक दस्तावेजों की कसौटी पर आ गया है। अधिकारियों का कहना है कि प्रमाणित अभिलेख ही इस बात का उत्तर देंगे कि नियुक्ति और पदोन्नति की प्रक्रिया नियमों के अनुरूप थी या नहीं। यदि जांच में नियमों का उल्लंघन पाया जाता है, तो भविष्य में प्रशासनिक कार्रवाई की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है। वर्तमान में संबंधित विभागीय अधिकारियों पर निदेशालय के निर्देशों के अनुपालन और समयबद्ध रिपोर्ट प्रस्तुत करने का दबाव है।

(संवाददाता)

संवाददाता के संपादक

संबंधित और अन्य महत्वपूर्ण खबरें

✍️ अपनी राय दें (Leave a Comment)

आपका ईमेल पता सार्वजनिक नहीं किया जाएगा।