गोरखपुर के सुथनी में कचरे से ऊर्जा उत्पादन की तैयारी
गोरखपुर शहर में कचरा प्रबंधन की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए सुथनी स्थित इंटीग्रेटेड वेस्ट मैनेजमेंट सिटी में कंप्रेस्ड बायो गैस (CBG) प्लांट की स्थापना की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। नगर निगम और इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IOCL) के संयुक्त प्रयास से यह परियोजना गोरखपुर के कचरा निस्तारण तंत्र को पूरी तरह से बदलने का काम करेगी। इस अत्याधुनिक प्लांट की स्थापना से न केवल शहर में कचरे के अंबार की समस्या कम होगी, बल्कि कचरे से ऊर्जा और जैविक खाद का उत्पादन भी संभव हो सकेगा।
प्लांट की कार्यक्षमता और तकनीकी विवरण
आधिकारिक जानकारी के अनुसार, प्रस्तावित सीबीजी प्लांट की दैनिक कचरा प्रसंस्करण क्षमता 200 टन निर्धारित की गई है। इस प्लांट में शहर से निकलने वाले गीले कचरे का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण किया जाएगा। परियोजना के आंकड़ों के मुताबिक, प्रतिदिन 200 टन कचरे के प्रसंस्करण से लगभग 7 टन बायो गैस और 40 टन उच्च गुणवत्ता वाली जैविक खाद का निर्माण किया जाएगा। यह बायो गैस ईंधन के रूप में इस्तेमाल की जा सकेगी, जबकि जैविक खाद स्थानीय कृषि कार्यों में किसानों के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध होगी।
परियोजना का समय-सीमा और टेंडर प्रक्रिया
इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IOCL) द्वारा इस महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट के निर्माण के लिए आधिकारिक टेंडर प्रक्रिया को पूर्ण कर लिया गया है। निविदा शर्तों के अनुसार, जो एजेंसी कार्य का ठेका प्राप्त करेगी, उसे तय समय-सीमा के भीतर इस प्लांट का निर्माण कार्य पूरा करना होगा। अधिकारियों ने बताया कि प्लांट तैयार करने के लिए डेढ़ साल (18 महीने) की अवधि निर्धारित की गई है। इस अवधि में सिविल निर्माण कार्य से लेकर मशीनरी की स्थापना और ट्रायल रन तक के कार्य पूरे किए जाएंगे।
शहर के लिए क्या होगा इसका महत्व
इस परियोजना से गोरखपुर को कई स्तरों पर लाभ मिलने की संभावना है। सबसे पहले, सुथनी स्थित डंपिंग ग्राउंड पर कचरे के ढेर में कमी आएगी, जिससे पर्यावरण प्रदूषण और दुर्गंध की समस्या में सुधार होगा। दूसरा, यह प्लांट शहर के ‘वेस्ट टू एनर्जी’ मॉडल को मजबूती प्रदान करेगा। किसानों को रियायती दर पर जैविक खाद मिलने से रसायन मुक्त खेती को बढ़ावा मिलेगा। इसके अतिरिक्त, स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। नगर निगम प्रशासन इस परियोजना की नियमित निगरानी करेगा ताकि निर्माण कार्य तय समय सीमा के भीतर गुणवत्ता के मानकों के साथ पूरा हो सके।