रिश्वतखोरी के खिलाफ एंटी करप्शन टीम की बड़ी कार्रवाई
शिक्षा विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण संगठन (ACB) गोरखपुर ने एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। विभाग में कार्यरत एक ज्येष्ठ लेखा परीक्षक को 10,000 रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया है। यह घटना गोरखपुर स्थित शिक्षा निदेशक, सप्तम खंड कार्यालय की है, जिसके बाद से विभागीय गलियारों में हड़कंप मच गया है।
क्या है पूरा मामला?
प्राप्त जानकारी के अनुसार, शिकायतकर्ता दिव्यांशु पाण्डेय ने भ्रष्टाचार निवारण संगठन गोरखपुर को एक प्रार्थना पत्र दिया था। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि उनकी माता श्रीमती सरोज दूबे, जो कि राजकीय कन्या इंटर कॉलेज, हाटा (कुशीनगर) में प्रवक्ता एवं प्रभारी प्रधानाध्यापिका के पद से सेवानिवृत्त हुई थीं, उनका 15 लाख रुपये का भुगतान अटका हुआ था। यह धनराशि 300 दिनों के उपार्जित अवकाश के नकदीकरण से संबंधित थी, जिसे संयुक्त शिक्षा निदेशक, गोरखपुर कार्यालय से जारी होना था।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि कार्यालय में तैनात पटल सहायक और ज्येष्ठ लेखा परीक्षक शहनवाज आलम ने इस फाइल को आगे बढ़ाने और भुगतान सुनिश्चित करने के बदले 10,000 रुपये की रिश्वत की मांग की थी।
गोपनीय जांच और ट्रैप की कहानी
शिकायत मिलने के बाद भ्रष्टाचार निवारण संगठन ने मामले की गंभीरता को समझते हुए इसकी गोपनीय जांच कराई। जांच के दौरान रिश्वत मांगे जाने की पुष्टि होने पर टीम ने आरोपी को रंगे हाथों पकड़ने के लिए जाल बिछाया। बुधवार, 19 अगस्त 2026 को दोपहर लगभग 1:19 बजे, जैसे ही शिकायतकर्ता ने शहनवाज आलम को रिश्वत की रकम दी, वैसे ही वहां तैनात टीम ने उसे मौके पर ही दबोच लिया।
आरोपी पर विधिक कार्रवाई शुरू
गिरफ्तार आरोपी की पहचान शहनवाज आलम, निवासी ग्राम बेलवा खुर्द, जनपद कुशीनगर के रूप में की गई है। आरोपी के पकड़े जाने के बाद कार्यालय में अफरा-तफरी का माहौल रहा। पुलिस और एंटी करप्शन टीम ने आरोपी को हिरासत में ले लिया है। इस पूरे मामले में थाना कैंट, गोरखपुर में अभियोग पंजीकृत किया गया है और नियमानुसार अग्रिम विधिक कार्रवाई की जा रही है। यह मामला सरकारी कार्यालयों में फाइलों के निस्तारण के नाम पर होने वाले भ्रष्टाचार पर एक कड़ा प्रहार माना जा रहा है।