निर्माण कार्य की निगरानी और विभागीय भूमिका
बुद्धा पार्क निर्माण परियोजना में अवर अभियंता (Junior Engineer) की भूमिका अब सवालों के घेरे में है। ठेकेदार द्वारा काम में देरी और धीमी गति के बावजूद, साइट पर निगरानी रखने वाले अधिकारियों द्वारा समय रहते उचित कार्रवाई क्यों नहीं की गई? यह प्रश्न परियोजना की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़ा करता है।
अनियमितता और बढ़ती पेनाल्टी का संकट
परियोजना के तहत निर्माण समयसीमा पूरी होने के बाद भी पार्क का काम अधूरा है, जिससे तीस लाख रुपये से अधिक की पेनाल्टी का बोझ बढ़ता जा रहा है। जांच के दौरान डीपीआर (DPR) उपलब्ध न करा पाना और कार्य की गुणवत्ता पर संदेह वित्तीय अनियमितताओं की ओर संकेत करते हैं। सरकारी धन के इस दुरुपयोग पर संबंधित अधिकारियों की चुप्पी स्थिति को और संदेहास्पद बनाती है।
जवाबदेही और निष्पक्ष जांच की मांग
बुद्धा पार्क एक सार्वजनिक संपत्ति है, जिसका लाभ जनता को अब तक नहीं मिल सका है। क्या यह मात्र विभागीय लापरवाही है या ठेकेदार को अनुचित लाभ पहुँचाने का प्रयास, यह स्पष्ट करने के लिए एक निष्पक्ष तकनीकी जांच आवश्यक है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि पेनाल्टी की वसूली और अधूरे निर्माण की पूर्णता अब सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।