बैठक में लंबित ऋण आवेदनों पर जताई नाराजगी
महराजगंज जिले में स्वरोजगार योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर प्रशासन ने सख्ती दिखाई है। कलक्ट्रेट सभागार में आयोजित उद्योग एवं व्यापार बंधु की बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्य विकास अधिकारी (CDO) महेंद्र कुमार सिंह ने बैंकों की कार्यप्रणाली पर असंतोष व्यक्त किया। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि किसी भी युवा के ऋण आवेदन को बिना किसी पुख्ता और वैध कारण के निरस्त न किया जाए।
लंबित मामलों के निस्तारण को प्राथमिकता
बैठक में समीक्षा के दौरान सामने आया कि स्वरोजगार संबंधी विभिन्न योजनाओं के तहत बड़ी संख्या में आवेदन अभी भी बैंकों में लंबित हैं। सीडीओ ने उपायुक्त उद्योग को निर्देश दिए कि वे बैंकवार लंबित आवेदनों की विस्तृत सूची तैयार करें और संबंधित शाखा प्रबंधकों के साथ समन्वय स्थापित कर इन आवेदनों का तत्काल निस्तारण सुनिश्चित करें। उन्होंने रोजगारपरक योजनाओं को प्राथमिकता देने पर जोर दिया।
योजनावार स्थिति का विवरण
समीक्षा में विभिन्न योजनाओं की प्रगति पर चर्चा हुई:
- मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान: इस वित्तीय वर्ष के लिए निर्धारित 1800 के लक्ष्य के सापेक्ष 1320 आवेदन बैंकों को प्रेषित किए गए। इनमें से 461 आवेदन स्वीकृत हुए हैं और 443 आवेदकों को ऋण वितरित किया जा चुका है। वर्तमान में 317 आवेदन स्वीकृति और 43 आवेदन ऋण वितरण के स्तर पर लंबित हैं।
- मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना: 128 के लक्ष्य के विरुद्ध 149 आवेदन भेजे गए, जिनमें से 47 स्वीकृत हुए और 33 में ऋण वितरण हुआ।
- ओडीओपी (ODOP) योजना: 26 के लक्ष्य के मुकाबले 34 आवेदन भेजे गए, जिनमें से 13 मामलों में ऋण वितरित किया गया।
सीडीओ ने विशेष रूप से ओडीओपी योजना के तहत काष्ठ उत्पाद कारोबार को बढ़ावा देने के लिए बैंकों से अधिक सहयोग की अपेक्षा की है।
जीएसटी पंजीयन पर व्यापारियों को सलाह
बैठक में व्यापारिक समस्याओं पर चर्चा करते हुए सीडीओ ने व्यापारियों से जीएसटी पंजीयन की संख्या बढ़ाने की अपील की। उन्होंने कहा कि पंजीयन कराने से व्यापारियों को मुख्यमंत्री व्यापारी दुर्घटना योजना के अंतर्गत 10 लाख रुपये तक के बीमा कवर का लाभ मिलता है। इस बैठक में उपायुक्त उद्योग नीरज सिंह, राज्यकर विभाग के अधिकारी, एलडीएम बीएन मिश्रा सहित जिले के प्रमुख उद्यमी और व्यापारी उपस्थित रहे। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में ऋण आवेदनों की समीक्षा में देरी होने पर संबंधित बैंक के खिलाफ सख्त रुख अपनाया जाएगा।