घटना का पूरा विवरण
महाराजगंज जिले के निचलौल स्थित कोर्ट मोहल्ला में मौजूद प्राचीन श्रीराम जानकी मंदिर परिसर में चल रहे निर्माण कार्य को लेकर उपजे विवाद के बाद शनिवार को प्रशासनिक अमला मौके पर पहुंचा। उपजिलाधिकारी (SDM) और तहसीलदार ने राजस्व टीम के साथ मंदिर परिसर का सघन निरीक्षण किया। यह कार्रवाई हाल ही में आयोजित ‘संपूर्ण समाधान दिवस’ में प्राप्त एक शिकायत के बाद अमल में लाई गई है।
स्थानीय निवासियों और मंदिर से जुड़े लोगों ने आरोप लगाया था कि नगर पंचायत प्रशासन द्वारा मंदिर की पुरानी बाउंड्री वॉल को हटाकर व्यावसायिक दुकानों का निर्माण कराया जा रहा है। शिकायतकर्ताओं ने आशंका जताई थी कि इस निर्माण कार्य से न केवल मंदिर की पवित्रता और स्वरूप प्रभावित होगा, बल्कि परिसर की व्यवस्था भी बाधित होगी। इसी के मद्देनजर प्रशासन ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया।
प्रशासनिक जांच और निर्देश
निरीक्षण के दौरान प्रशासनिक अधिकारियों ने निर्माण स्थल की पैमाइश और राजस्व रिकॉर्ड की स्थिति की समीक्षा की। अधिकारियों ने स्पष्ट निर्देश दिए कि कोई भी निर्माण कार्य नियमों के तहत ही होना चाहिए। इसके अलावा, अधिकारियों ने मंदिर परिसर में व्याप्त गंदगी पर नाराजगी जताते हुए इसे तत्काल साफ करने के निर्देश दिए। साथ ही, मंदिर की धर्मशाला की जर्जर हो चुकी दीवारों की मरम्मत कराने के लिए भी निर्देशित किया गया है ताकि किसी भी दुर्घटना की संभावना को टाला जा सके।
अधिकारियों का पक्ष
तहसीलदार अमित कुमार सिंह ने जानकारी दी कि मंदिर के पुजारी ने बाउंड्री वॉल हटाकर निर्माण कार्य करने को लेकर अपनी आपत्ति दर्ज कराई थी। उन्होंने स्पष्ट किया, ‘राजस्व निरीक्षक के साथ की गई जांच में यह पाया गया कि वर्तमान निर्माण कार्य बाजार की भूमि पर हो रहा है। मौके पर किसी भी प्रकार की अनियमितता या मंदिर की भूमि पर अतिक्रमण जैसी कोई बड़ी समस्या सामने नहीं आई है।’ हालांकि, प्रशासन ने यह भी सुनिश्चित करने को कहा है कि विकास कार्यों के दौरान मंदिर की धार्मिक गरिमा और प्राथमिकता बनी रहे।
स्थानीय लोगों पर असर
इस मामले के सामने आने के बाद स्थानीय लोगों में चर्चा का माहौल है। निचलौल नगर पंचायत के इस क्षेत्र में मंदिर का अपना ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व है। फिलहाल, प्रशासनिक अधिकारियों के निरीक्षण और स्पष्टीकरण के बाद स्थिति सामान्य बनी हुई है। प्रशासन ने मंदिर प्रबंधन को परिसर की सुरक्षा और साफ-सफाई बनाए रखने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए हैं, ताकि क्षेत्रवासियों की धार्मिक भावनाओं को ठेस न पहुंचे और विकास कार्य भी सुचारू रूप से चल सकें।