57वें वर्ष में सिसवा का दुर्गा पूजा महोत्सव
महराजगंज जिले के सिसवा बाजार में दुर्गा पूजा महोत्सव का एक लंबा और गौरवशाली इतिहास रहा है। वर्ष 1969 में मात्र तीन प्रतिमाओं की स्थापना से शुरू हुई यह परंपरा आज 57वें वर्ष में प्रवेश कर चुकी है। इस बार सिसवा बाजार के विभिन्न वार्डों में कुल 30 भव्य पंडाल बनाए गए हैं, जहां मां दुर्गा की प्रतिमाएं विराजेंगी। समय के साथ इस महोत्सव का स्वरूप इतना व्यापक हो गया है कि इसकी ख्याति न केवल महराजगंज बल्कि पड़ोसी मित्र राष्ट्र नेपाल तक फैली हुई है।
ऐतिहासिक शुरुआत और संघर्ष
महोत्सव की शुरुआत के बारे में स्थानीय निवासियों ने पुरानी यादें साझा कीं। नगर पंचायत सिसवा बाजार के वयोवृद्ध निवासी हरिश्चंद्र बताते हैं कि जैनी छपरा इलाके में इस पूजा की नींव रखी गई थी। वर्ष 1969 में स्थानीय शिक्षक राधेश्याम गुप्ता और व्यापारी शिवपूजन जायसवाल ने इस परंपरा को शुरू करने की महत्वपूर्ण पहल की थी। इसके साथ ही जंगी सिंह ने श्रीराम जानकी मंदिर समिति का गठन किया और प्राइमरी पाठशाला के निकट पहली प्रतिमा स्थापित करवाई।
उस दौर की कठिनाइयों को याद करते हुए बताया गया कि तब स्थानीय स्तर पर प्रतिमाएं बनाने वाले कलाकार उपलब्ध नहीं थे। पहली प्रतिमा को लाने के लिए दुर्गा पूजा से दो महीने पहले तीन बैलगाड़ियों को नेपाल के भैरहवा भेजा गया था। यह कठिन यात्रा उस आस्था की गवाह है जिसने आज एक विशाल महोत्सव का रूप ले लिया है।
लगातार बढ़ता गया महोत्सव का विस्तार
वर्ष 1970 में नगर देवी और काली माता स्थान पर दो और प्रतिमाओं की स्थापना के साथ ही महोत्सव का विस्तार तेजी से हुआ। सिसवा बाजार के दुर्गा पूजा महोत्सव में हर साल श्रद्धालुओं को न केवल अनूठी प्रतिमाएं देखने को मिलती हैं, बल्कि आकर्षक पंडाल और सामाजिक संदेशों से सजी झांकियां भी प्रमुख आकर्षण का केंद्र रहती हैं। आज यह महोत्सव पूरे क्षेत्र के लिए एकता और सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक बन चुका है। प्रशासन और स्थानीय समितियां इस वर्ष की तैयारियों में पूरी तरह जुटी हुई हैं ताकि लाखों की संख्या में पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को कोई असुविधा न हो।