संघर्ष से सफलता तक की दास्तां
बिहार के गोपालगंज जिले में एक गृहिणी की जीवटता ने मिसाल पेश की है। हथुआ प्रखंड के दक्षिण मोहल्ला निवासी नरगिस खातून, जो छह बच्चों की मां हैं, आज अपने हुनर के दम पर न केवल अपना परिवार संभाल रही हैं, बल्कि अन्य महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता का प्रतीक बन गई हैं। नरगिस खातून की यह कहानी साल 2020 में शुरू हुई, जब उनके पति मोहर्रम मियां एक सड़क हादसे का शिकार हो गए। दुर्घटना में उनके पति का पैर टूट गया, जिसके चलते वे शारीरिक रूप से अक्षम हो गए और परिवार की आर्थिक स्थिति अचानक डांवाडोल हो गई।
जीविका समूह से मिली नई पहचान
परिवार पर आए इस कठिन दौर में नरगिस ने हार मानने के बजाय जिम्मेदारी उठाई। तीन बेटों और तीन बेटियों की परवरिश का भार कंधों पर होने के बावजूद, उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। वह बिहार सरकार द्वारा संचालित जीविका समूह से जुड़ीं और उन्होंने बांसुरी बनाने का हुनर सीखने का निर्णय लिया। कड़ी मेहनत और लगन से उन्होंने न केवल बांसुरी बनाना सीखा, बल्कि जल्द ही इसमें निपुणता भी हासिल कर ली।
कैसे बढ़ी कमाई और लोकप्रियता
नरगिस बताती हैं कि अब वह घर बैठे ही बांसुरी तैयार करती हैं। उनके द्वारा बनाई गई बांसुरियों की मांग केवल गोपालगंज तक सीमित नहीं है, बल्कि बिहार के अन्य जिलों और राज्य के बाहर भी है। उनकी कमाई की स्थिति के बारे में पूछने पर उन्होंने बताया कि जब मेलों और बाजारों में मांग अच्छी होती है, तो वह महीने भर में 50,000 रुपये तक कमा लेती हैं। सामान्य दिनों में यह कमाई 20,000 से 30,000 रुपये के बीच रहती है।
अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा
नरगिस का यह सफर यह साबित करता है कि सही मार्गदर्शन और दृढ़ इच्छाशक्ति से कोई भी विपरीत परिस्थितियों को अनुकूल बना सकता है। आज बांसुरी की मधुर धुन के पीछे एक मां का संघर्ष, बच्चों के बेहतर भविष्य की चिंता और परिवार को सम्मान के साथ चलाने का जज्बा छिपा है। स्थानीय लोग अब उन्हें एक साहसी महिला के रूप में देखते हैं, जिन्होंने अपनी कला के दम पर आर्थिक संकट को पीछे छोड़ दिया है। उनका यह कार्य स्थानीय क्षेत्र में स्वरोजगार के प्रति लोगों के नजरिए को भी सकारात्मक रूप से प्रभावित कर रहा है।