आरोग्य मंदिरों में स्क्रीनिंग और डाटा एंट्री पर संकट
महाराजगंज जिले में सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों (सीएचओ) की अनिश्चितकालीन हड़ताल का सीधा असर आम लोगों को मिलने वाली स्वास्थ्य सेवाओं पर दिखने लगा है। 28 सितंबर से शुरू हुई यह हड़ताल अब स्वास्थ्य विभाग के लिए बड़ी चुनौती बन गई है, जिसके चलते जिले के 179 आरोग्य मंदिरों में मरीजों की स्क्रीनिंग का कार्य पूरी तरह से ठप हो गया है।
स्थानीय स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, इन केंद्रों पर सीएचओ के माध्यम से मरीजों की नियमित जांच और स्क्रीनिंग की जाती है। विभाग द्वारा निर्धारित लक्ष्य के अनुसार, एक माह के भीतर जिले में कुल 14,774 लोगों की स्क्रीनिंग होनी थी, लेकिन कार्य बाधित होने के कारण यह लक्ष्य अभी भी अधूरा है। मरीजों को समय पर जांच की सुविधा न मिलने से उन्हें नजदीकी सामुदायिक या जिला अस्पतालों की ओर रुख करना पड़ रहा है, जिससे वहां भी मरीजों का दबाव बढ़ गया है।
‘यूविन’ पोर्टल पर डाटा अपलोडिंग में आ रही बड़ी दिक्कत
हड़ताल का प्रभाव केवल स्क्रीनिंग तक ही सीमित नहीं है। टीकाकरण कार्यक्रम के तहत बच्चों और अन्य लाभार्थियों की जानकारी को ‘यूविन’ (U-WIN) पोर्टल पर अपलोड करना अनिवार्य होता है। सीएचओ के काम पर न होने के कारण यह महत्वपूर्ण प्रक्रिया भी प्रभावित हुई है। वर्तमान में टीकाकरण के बाद का डाटा समय पर पोर्टल पर अपडेट नहीं हो पा रहा है, जिससे भविष्य में लाभार्थियों को प्रमाण पत्र और टीकाकरण के रिकॉर्ड में परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
स्वास्थ्य विभाग की स्थिति और प्रभाव
जिला स्वास्थ्य प्रशासन के मुताबिक, इन केंद्रों पर तैनात सीएचओ के बिना स्वास्थ्य सेवाओं का संचालन सुचारू रूप से कर पाना मुश्किल हो रहा है। हड़ताल के कारण प्राथमिक स्वास्थ्य स्तर पर मिलने वाली ओपीडी सेवाएं और अन्य विभागीय रिपोर्टिंग भी प्रभावित हुई हैं। प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा अभी तक हड़ताल को समाप्त करने को लेकर कोई समाधान नहीं निकल पाया है, जिससे स्थिति और गंभीर होती जा रही है।
स्थानीय निवासी और आरोग्य मंदिरों पर निर्भर रहने वाले मरीजों को इस अव्यवस्था के कारण काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। विभागीय जानकारों का मानना है कि यदि जल्द ही सीएचओ अपनी मांगों को लेकर प्रशासन के साथ किसी समझौते पर नहीं पहुंचते हैं, तो टीकाकरण और स्क्रीनिंग से जुड़ी स्वास्थ्य गतिविधियों का पिछड़ना तय है। विभाग की ओर से वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित करने के प्रयासों पर अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।