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Maharajganj News: नारायणी के बैक रोलिंग से खैरखुटा में कटान तेज, चार घरों पर खतरा

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खैरखुटा टोले में नदी का रौद्र रूप

महराजगंज जिले के अहिरौली दान गांव स्थित खैरखुटा टोले में नारायणी (गंडक) नदी ने विकराल रूप धारण कर लिया है। नदी के जलस्तर में गिरावट आने के साथ ही ‘बैक रोलिंग’ शुरू हो गई है, जिससे तटवर्ती इलाकों में कटान की गति अचानक तेज हो गई है। स्थिति इतनी गंभीर है कि पिछले महज 10 घंटों में नदी ने करीब 500 मीटर भूमि का कटाव कर दिया है, जिससे स्थानीय निवासियों में भारी दहशत का माहौल है।

चार परिवारों के आशियाने खतरे की जद में

नदी के तेज कटाव के कारण चार पक्के और कच्चे मकान सीधे खतरे की जद में आ गए हैं। जानकारी के अनुसार, मजिस्टर पासवान, रामपूजन पासवान, भगवान पासवान और सुग्रीव के मकानों की नींव से नदी अब केवल तीन फीट की दूरी पर है। अपने आशियानों को उजड़ता देख इन परिवारों ने पूरी रात दहशत में तटबंध पर गुजारी है। इसके अलावा गांव के अन्य निवासी जैसे राजबली सिंह, हीरा शर्मा और शिवपूजन पासवान के घर भी कटाव के मुहाने पर खड़े हैं।

प्रशासनिक कार्रवाई और बचाव कार्य

कटान की सूचना मिलते ही बाढ़ खंड, सेवरही के अधिकारी और तरयासुजान पुलिस मौके पर पहुंच गए हैं। कुशीनगर के बाढ़ खंड के अधिशासी अभियंता (XEN) एमके सिंह के नेतृत्व में बचाव कार्य युद्धस्तर पर चलाया जा रहा है। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए मौके पर एक क्रेन, दो जेसीबी मशीन और 30 से अधिक मजदूरों को तैनात किया गया है। विभाग की ओर से बोल्डर और जियो बैग डालकर नदी की धारा मोड़ने और कटान की रफ्तार कम करने का निरंतर प्रयास किया जा रहा है।

दशकों से संवेदनशील इलाका

स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि अहिरौली दान गांव का यह अंतिम छोर पिछले एक दशक से अधिक समय से संवेदनशील बना हुआ है। वर्ष 2012 की प्रलयंकारी बाढ़ में बैरिया टोला, कंचन टोला और चित्तू टोला का अस्तित्व पूरी तरह नदी में विलीन हो गया था। ग्रामीणों का आरोप है कि पिछले दो-तीन वर्षों में यहाँ कोई प्रभावी सुरक्षा कार्य नहीं कराया गया, जिसके कारण तटबंध की सुरक्षा दीवारें (एप्रन) जर्जर हो चुकी हैं।

प्रशासन का पक्ष

बाढ़ खंड के अधिशासी अभियंता एमके सिंह ने बताया कि जलस्तर घटने के कारण नदी की ‘बैक रोलिंग’ बढ़ गई है, जिससे कटाव तेज हुआ है। उन्होंने कहा कि विभाग पूरी तरह से सतर्क है और कटान रोकने के लिए युद्धस्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं। स्थानीय निवासियों को नदी के किनारे न जाने की सलाह दी गई है ताकि किसी भी प्रकार की अनहोनी को रोका जा सके।

(संवाददाता)

संवाददाता के संपादक

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