गड़ौरा चीनी मिल को प्रशासन की सख्त चेतावनी
महराजगंज जिले में गड़ौरा चीनी मिल पर जिला प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाते हुए 1.80 करोड़ रुपये की रिकवरी का नोटिस जारी किया है। प्रशासन ने मिल प्रबंधन को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे 20 नवंबर तक बकाया राशि का भुगतान सुनिश्चित करें। यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर भुगतान नहीं किया जाता है, तो प्रशासन ने मिल की संपत्ति कुर्क करने की कड़ी चेतावनी दी है।
यह कार्रवाई स्थानीय किसानों और मिल कर्मचारियों के लंबे समय से लंबित बकाये को लेकर की गई है। एसडीएम निचलौल अवनीश कुमार त्रिपाठी ने मामले की जानकारी देते हुए बताया कि जिला गन्ना अधिकारी की रिपोर्ट के आधार पर डीएम कार्यालय ने यह रिकवरी नोटिस जारी किया है। गन्ना मूल्य भुगतान के नियमों के तहत, मिल को गन्ना खरीद के 14 दिनों के भीतर किसानों को भुगतान करना अनिवार्य होता है, जिसका कथित उल्लंघन चीनी मिल प्रबंधन द्वारा किया गया है।
किसानों के सामने गन्ने की बिक्री का संकट
गड़ौरा चीनी मिल का आवंटन रद्द होने के बाद निचलौल क्षेत्र के किसानों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। जिला प्रशासन और गन्ना विभाग का कहना है कि निचलौल के किसानों का गन्ना अब हाटा (कुशीनगर) और पिपराइच (गोरखपुर) की मिलों द्वारा खरीदा जाएगा। हालांकि, जमीनी स्थिति चिंताजनक है। अभी तक इन मिलों द्वारा निचलौल की किसी भी ग्राम पंचायत में गन्ना क्रय केंद्र या ‘कांटा’ स्थापित नहीं किया गया है।
इस अव्यवस्था के कारण, किसान अपनी तैयार फसल को लेकर असमंजस में हैं। मजबूरी में किसान अपना गन्ना स्थानीय कोल्हू और क्रशरों को 200 से 250 रुपये प्रति क्विंटल की कम कीमत पर बेचने को मजबूर हैं। इससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है, जबकि उनके पास अपनी फसल निकालने के लिए कोई अन्य विकल्प नहीं बचा है।
क्षेत्र में गन्ने की खेती और मिलों का इतिहास
कभी महराजगंज जिले में 40 हजार हेक्टेयर भूमि पर गन्ने की खेती होती थी, जो अब सिमटकर आधी रह गई है। एक समय था जब घुघली, सिसवा, गड़ौरा और फरेंदा में चार चीनी मिलें सुचारू रूप से संचालित थीं। मिल प्रबंधन की कथित मनमानी और प्रशासनिक उदासीनता के कारण आज केवल दो मिलें ही बची हैं। गड़ौरा मिल की यह स्थिति न केवल किसानों की आजीविका को प्रभावित कर रही है, बल्कि कृषि क्षेत्र के भविष्य पर भी प्रश्नचिह्न लगा रही है। अब स्थानीय निवासियों और किसान संगठनों की नजरें 20 नवंबर की डेडलाइन पर टिकी हैं कि क्या प्रशासन इस रिकवरी को पूरा करा पाएगा या नहीं।