नवरात्र में चांदी की महंगाई का असर
महराजगंज जिले के सराफा बाजार में इस बार नवरात्र के दौरान देवी मां को अर्पित किए जाने वाले चांदी के छत्रों की मांग और खरीद के तरीके में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। चांदी की कीमतों में हुई ऐतिहासिक वृद्धि के कारण भक्तों को अपनी परंपरा निभाने के लिए अपने बजट को संतुलित करना पड़ रहा है। अब श्रद्धालु भारी वजन वाले छत्रों के स्थान पर हल्के वजन वाले ‘लाइटवेट’ छत्रों को प्राथमिकता दे रहे हैं।
सराफा बाजार में बढ़ी लाइटवेट छत्र की मांग
स्थानीय सराफा व्यापारियों के अनुसार, शनिवार को चांदी का भाव 2 लाख 10 हजार रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है। पहले जो श्रद्धालु नवरात्र के दौरान 50 ग्राम या उससे अधिक वजन के चांदी के छत्र खरीदते थे, वे अब आर्थिक कारणों से 10 से 15 ग्राम के छोटे छत्रों की तलाश कर रहे हैं। सराफा कारोबारी राजकुमार वर्मा ने बताया कि इस सीजन में अब तक लगभग 75 छत्रों की बिक्री हो चुकी है और नवमी तक यह मांग जारी रहने की उम्मीद है।
बढ़ते दाम और जीएसटी का गणित
वर्तमान में 15 ग्राम के एक छोटे छत्र की कीमत करीब 3000 रुपये तक आ रही है, और इसमें मेकिंग चार्ज व जीएसटी जोड़ने के बाद यह राशि और बढ़ जाती है। सराफा कारोबारी गणेश वर्मा ने इस स्थिति पर स्पष्ट किया कि चांदी की कीमतें इस समय रिकॉर्ड ऊंचाई पर हैं, जिसके चलते बाजार में केवल लाइटवेट छत्र ही ग्राहकों की पहली पसंद बने हुए हैं।
श्रद्धा पर भारी महंगाई
देवी मां को चांदी का छत्र चढ़ाना सुख, समृद्धि और ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार ग्रहों के दोष निवारण का प्रतीक माना जाता है। हालांकि, महंगाई के कारण बदलते बाजार के बीच श्रद्धालुओं का कहना है कि पूजा में भाव और भावना का महत्व अधिक है। भक्तों का मानना है कि वजन कम होने से उनकी श्रद्धा में कोई कमी नहीं आती है, और वे अपनी सामर्थ्य के अनुसार छोटे छत्र अर्पित कर अपनी धार्मिक परंपराओं को पूर्ण कर रहे हैं।