महराजगंज जिला अस्पताल के एसएनसीयू में दबाव बढ़ा
महराजगंज जिला अस्पताल स्थित सिक न्यूबॉर्न केयर यूनिट (एसएनसीयू) पर स्वास्थ्य सेवाओं का भारी दबाव देखा जा रहा है। सितंबर 2026 के आंकड़ों के अनुसार, 32 बेड वाली इस यूनिट में कुल 489 नवजातों को भर्ती किया गया। इस अत्यधिक संख्या के कारण यहां बेड ऑक्यूपेंसी रेट 128.2 प्रतिशत तक पहुंच गया है, जो स्वास्थ्य व्यवस्था की चुनौतीपूर्ण स्थिति को दर्शाता है।
स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक, भर्ती होने वाले 489 नवजातों में से केवल 81 का जन्म जिला अस्पताल में हुआ था, जबकि 408 बच्चों को विभिन्न बाहरी स्वास्थ्य केंद्रों और स्थानों से गंभीर अवस्था में यहां लाया गया था। अगस्त 2026 में यह संख्या 461 थी, जो सितंबर में 28 की वृद्धि के साथ 489 तक पहुंच गई।
स्वास्थ्य रिपोर्ट और नवजातों की स्थिति
सितंबर माह में एसएनसीयू से जुड़ी स्वास्थ्य रिपोर्ट के अनुसार, कुल 347 नवजात उपचार के बाद पूरी तरह स्वस्थ होकर अपने घरों को लौटे। हालांकि, 93 बच्चों की नाजुक स्थिति को देखते हुए उन्हें बेहतर उपचार के लिए उच्च स्वास्थ्य केंद्रों में रेफर करना पड़ा। इसके अलावा, 30 बच्चों के परिजन बिना चिकित्सकीय परामर्श के ही इलाज बीच में छोड़कर चले गए। दुर्भाग्यवश, उपचार के दौरान चार नवजातों की मृत्यु भी हुई, जबकि अगस्त माह में यह आंकड़ा सात था।
निचलौल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की स्थिति
जिले के निचलौल स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) के एसएनसीयू में भी नवजातों की भर्ती दर में इजाफा हुआ है। अगस्त की तुलना में सितंबर में भर्ती होने वाले बच्चों की संख्या 54 से बढ़कर 63 हो गई। इन 63 बच्चों में से 33 का जन्म स्थानीय सीएचसी में हुआ, जबकि 30 को बाहर से लाया गया था।
निचलौल सीएचसी के लिए राहत की बात यह रही कि सितंबर के दौरान किसी भी नवजात की मौत की खबर नहीं है। यहाँ का बेड ऑक्यूपेंसी रेट 92.26 प्रतिशत दर्ज किया गया। उपचार के बाद 56 बच्चे स्वस्थ होकर घर लौट गए, जबकि छह बच्चों को रेफर किया गया और एक मामले में परिजन इलाज छोड़कर चले गए। महीने के अंत तक इस यूनिट में कोई भी बच्चा भर्ती नहीं था।
विशेषज्ञों का कहना है कि नवजात देखभाल इकाइयों पर बढ़ रहा यह दबाव जिले में स्वास्थ्य सुविधाओं को और सुदृढ़ करने की आवश्यकता की ओर इशारा करता है, ताकि रेफर किए जाने वाले बच्चों की संख्या को कम किया जा सके और स्थानीय स्तर पर ही गुणवत्तापूर्ण इलाज सुनिश्चित हो सके।