महराजगंज जिले में स्वास्थ्य सेवाओं के आंकड़ों में गिरावट
महराजगंज जिले में स्वास्थ्य सुविधाओं और प्रसव के तरीकों को लेकर चिंताजनक आंकड़े सामने आए हैं। हालिया आंकड़ों के अनुसार, जिले में संस्थागत प्रसव (Institutional Delivery) की दर में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS) के आंकड़ों का विश्लेषण करें तो वर्ष 2019-20 में संस्थागत प्रसव दर 93.2 प्रतिशत थी, जो वर्ष 2023-24 में घटकर 87 प्रतिशत पर आ गई है। यह 6.2 प्रतिशत अंकों की कमी मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य के प्रति प्रशासनिक और सामाजिक जागरूकता की दृष्टि से एक बड़ा संकेत है।
सिजेरियन प्रसव की दर में वृद्धि
संस्थागत प्रसव की संख्या में कमी के साथ ही सिजेरियन प्रसव के मामलों में भी बदलाव देखा गया है। आंकड़ों के मुताबिक, जिले में सिजेरियन प्रसव की कुल दर 14.7 प्रतिशत से बढ़कर 17.4 प्रतिशत हो गई है। निजी अस्पतालों में प्रसव कराने वाली महिलाओं के अनुपात में भी गिरावट आई है, जो पहले 77.5 प्रतिशत थी और अब 58.9 प्रतिशत रह गई है। हालांकि, सरकारी अस्पतालों में सिजेरियन प्रसव की दर 7.2 प्रतिशत से घटकर 3.2 प्रतिशत दर्ज की गई है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह और सरकारी प्रयास
स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. रोमा गुप्ता ने स्पष्ट किया कि प्रसव के दौरान जच्चा और बच्चा की सुरक्षा के लिए किसी स्वास्थ्य संस्थान में प्रसव कराना अत्यंत आवश्यक है। प्रसव के समय अत्यधिक रक्तस्राव, उच्च रक्तचाप या संक्रमण जैसी गंभीर जटिलताएं अचानक हो सकती हैं, जिनका प्रबंधन घर पर संभव नहीं है।
सरकारी सुविधाओं का लाभ
महराजगंज के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) डॉ. सुरेंद्र कुमार चौधरी ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग सुरक्षित प्रसव के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। डिप्टी सीएमओ डॉ. केपी सिंह ने विभाग द्वारा दी जा रही सुविधाओं की जानकारी देते हुए कहा:
- सरकारी अस्पतालों में प्रसव, दवाएं, जांच और भोजन की सुविधा पूर्णतः निशुल्क है।
- प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के तहत पात्र महिलाओं को आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है।
- जननी सुरक्षा योजना के अंतर्गत भी लाभार्थियों को लाभ दिया जा रहा है।
- प्रसव के बाद जच्चा-बच्चा को घर तक पहुंचाने के लिए 102 एंबुलेंस सेवा चौबीसों घंटे सक्रिय है।
प्रशासन का मुख्य उद्देश्य मातृ और शिशु मृत्यु दर को कम करना है। इसके लिए आशा बहुओं और एएनएम के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में गर्भवती महिलाओं को जागरूक करने का निरंतर प्रयास किया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग ने सभी गर्भवती महिलाओं से नियमित स्वास्थ्य जांच कराने और निकटतम सरकारी अस्पताल में ही प्रसव कराने की अपील की है।